कुचामन सिटी. चेक अनादरण के दो अलग-अलग मामलों में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट दुष्यंत गुर्जर ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी नरेश कुमार अग्रवाल को दोषसिद्ध किया है।
न्यायालय ने दोनों मामलों में उसे एक-एक साल के साधारण कारावास के साथ प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश दिया है। प्रतिकर राशि अदा नहीं करने पर दोनों मामलों में 15-15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

प्रकरण के अनुसार – कुचामन सिटी निवासी गौरव नागर ने नरेश कुमार अग्रवाल पुत्र गोविंदलाल निवासी भोपजी वालों की गली, कुचामन सिटी को 4 लाख रुपए उधार दिए थे। उधार राशि के भुगतान के लिए नरेश कुमार ने गौरव नागर को दो चेक जारी किए थे। इनमें एक चेक 1 लाख रुपए तथा दूसरा 3 लाख रुपए का था।
गौरव नागर ने दोनों चेक भुगतान प्राप्त करने के लिए बैंक में जमा करवाए, लेकिन चेक जारी करने के बाद नरेश कुमार द्वारा भुगतान पर रोक (पेमेंट स्टॉप) करवा दी गई। इसके चलते दोनों चेक बिना भुगतान के बैंक से वापस लौट गए।


नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं किया, कोर्ट में पहुंचा मामला
चेक अनादरण के बाद कानूनी नोटिस दिए जाने के बावजूद उधार राशि का भुगतान नहीं किया गया।
इसके बाद गौरव नागर ने अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक के माध्यम से स्थानीय न्यायालय में परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 एवं 142 के तहत परिवाद दर्ज करवाया।
दोनों पक्षों की साक्ष्य पूर्ण होने और बहस सुनने के बाद विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट दुष्यंत गुर्जर ने खुले न्यायालय में फैसला सुनाया। न्यायालय ने 1 लाख रुपए के चेक के मामले में 1.50 लाख रुपए प्रतिकर तथा 3 लाख रुपए के चेक के मामले में 4.55 लाख रुपए प्रतिकर अदा करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों मामलों में आरोपी को एक-एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
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