कुचामन सिटी. शहर की बीड़ गौशाला परिसर में नवनिर्मित सीतादेवी-सत्यनारायण काबरा सत्संग भवन में 13 से 19 अक्टूबर तक विशाल श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
सोमवार को स्टेशन रोड स्थित ‘साकेत’ में कथा के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया गया। इसके बाद यशोदावतार श्रीजी बाबा के पुत्र एवं कथा व्यास ब्रजभक्त रमाकांत गोस्वामी ने प्रेस वार्ता में आयोजन की विस्तृत जानकारी दी।

गोस्वामी ने बताया कि 13 अक्टूबर को बीड़ गौशाला परिसर में नवनिर्मित सीतादेवी-सत्यनारायण काबरा सत्संग भवन का लोकार्पण किया जाएगा। इसी उपलक्ष्य में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ आयोजित होगा। कथा प्रतिदिन प्रातः 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तक तथा सायं 4 से 6 बजे तक होगी।
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उन्होंने बताया कि कथा का विशेष आकर्षण यशोदावतार श्रीजी बाबा के लाडले बालकृष्ण प्रभु की उपस्थिति रहेगी। पुष्टिमार्गीय संप्रदाय की परंपरा के अनुसार उनके अष्टयाम सेवा-दर्शन होंगे। सातों दिन अलग-अलग मनोरथ आयोजित किए जाएंगे। इनमें महारास उत्सव, गौचारण, ठाकुरजी का हटरी में विराजना, झूला उत्सव, नंद महोत्सव और छप्पन भोग सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
सनातन धर्म के शुद्ध संदेश पर दिया जोर
गोस्वामी ने कहा कि सनातन धर्म के दो प्रमुख आधार हमारे तीर्थ और हमारे ग्रंथ हैं। समाज में शुद्ध कथा-वाचन अत्यंत आवश्यक है। कथा के माध्यम से सनातन धर्म का वास्तविक और शुद्ध संदेश आमजन तक पहुंचना चाहिए। इसी उद्देश्य से वे कथा का वाचन कर रहे हैं।
श्रीमद्भागवत महापुराण में महिलाओं की भूमिका से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि इसमें अनेक महिलाओं की कथाएं हैं, जो समाज को आदर्श जीवन की प्रेरणा देती हैं। महिलाओं को विद्वान, सामाजिक रूप से जागरूक और आत्मसंतुष्ट होना चाहिए। देवी-देवताओं के चरित्र से जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म सभी के लिए है और सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है।
‘इन मर्दों का क्या भरोसा’ संबंधी सवाल पर गोस्वामी ने कहा कि इस प्रकार का संदेश उचित नहीं है और वे इससे सहमत नहीं हैं। महिला और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। एक-दूसरे की आलोचना के बजाय परस्पर सहयोग, सम्मान और साथ की आवश्यकता है।
संत समाज में उपाधियों की गरिमा पर जोर
संत समाज में प्रतिस्पर्धा से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत, चारों वेद और उपनिषदों के गहन जानकार संत को ही जगद्गुरु जैसी उपाधि की वास्तविक गरिमा के अनुरूप माना जाना चाहिए।
संत समाज में उपाधियां योग्यता और ज्ञान के आधार पर दी जानी चाहिए। उन्होंने वर्तमान में वैष्णव एवं शैव अखाड़ों में विभिन्न उपाधियां प्रदान किए जाने की परंपरा पर भी अपने विचार रखे तथा उपाधियों की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया।
गोस्वामी ने कहा कि समाज में व्याप्त विकृतियों को दूर करने के लिए कथा-वाचकों और संत समाज को सकारात्मक संदेश देना चाहिए। वे अपनी कथा के दौरान भी लोगों को प्रेरित करेंगे कि धार्मिक उत्सव यथासंभव धार्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाएं। उन्होंने गौसेवा और गौशालाओं में धार्मिक एवं सेवा कार्यों के महत्व पर भी विशेष जोर दिया।
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इस अवसर पर कुचामन विकास समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश काबरा, कथा आयोजन परिवार के बसंत कुमार, मनोज कुमार, मुकेश कुमार काबरा, समाजसेवी सुभाष रांवका, अशोक मंत्री, ललित काबरा, पार्षद हेमराज पारीक सहित अनेक प्रबुद्धजन मौजूद रहे।







