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कुचामन सिटी: कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला, विद्यार्थियों ने सीखे 5R के सूत्र और निकाली जागरूकता रैली

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कुचामन सिटी. स्टेशन रोड स्थित पीएम श्री जवाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुचामन सिटी में “कचरा-वेस्ट नहीं, संसाधन है” विषय पर कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

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कार्यशाला के मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट एवं पर्यावरणविद् डॉ. प्रदीप चौधरी रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्लास्टिक के दुष्प्रभाव तथा दैनिक जीवन में कचरा कम करने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

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डॉ. प्रदीप चौधरी ने कहा कि वर्तमान में ऋतु चक्र एवं वर्षा चक्र में जो असंतुलन दिखाई दे रहा है और जिसे हम ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं, उसके पीछे अनेक कारण हैं।

इनमें हमारी दैनिक, व्यापारिक एवं औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले कचरे का अनुचित निस्तारण भी एक महत्वपूर्ण कारण है। कचरे का सही ढंग से निस्तारण नहीं होने पर वायु, जल एवं मृदा प्रदूषण बढ़ता है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से जलवायु परिवर्तन की समस्या और गंभीर होती है।

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सिंगल यूज प्लास्टिक से दूरी बनाना जरूरी

डॉ. चौधरी ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती है। प्लास्टिक की अनेक वस्तुएं प्राकृतिक रूप से बहुत लंबे समय तक नष्ट नहीं होतीं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि टॉफी के रैपर, चिप्स एवं कुरकुरे के पैकेट जैसे छोटे-छोटे कचरे को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जहां तक संभव हो, ऐसे उत्पादों के उपयोग से बचें और यदि उनका उपयोग किया गया है तो उनके रैपर को इधर-उधर फेंकने के बजाय अलग से एकत्रित करें।

उन्होंने विद्यार्थियों को खाली पेन के चैंबर, प्लास्टिक के खोखे एवं अन्य छोटे प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर नहीं फेंकने तथा निर्धारित स्थान पर एकत्रित करने की सलाह दी।

घर से शुरू करें कचरा पृथक्करण

डॉ. चौधरी ने कहा कि कचरा प्रबंधन की सबसे पहली शुरुआत घर से होनी चाहिए। घर में निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करके रखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि

नीला डिब्बा – सूखा कचरा
हरा डिब्बा – गीला एवं जैविक कचरा
लाल डिब्बा – हानिकारक/खतरनाक कचरा

पुनः उपयोग एवं पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग एकत्रित कर उचित व्यवस्था के माध्यम से भेजा जाए।

उन्होंने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्लास्टिक को जीवनशैली से दूर करने का प्रयास करें तथा अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करें।

कपड़े का थैला लेकर ही जाएं बाजार

डॉ. चौधरी ने कहा कि बाजार से सामान लाते समय घर से कपड़े का थैला साथ लेकर जाएं और उसी का बार-बार उपयोग करें। अधिक सामान हो तो एक से अधिक कपड़े के थैलों का प्रयोग करें। सब्जी एवं अन्य सामान के लिए भी जहां संभव हो, स्टील अथवा अन्य टिकाऊ एवं पुनः उपयोग योग्य पात्रों को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने कहा कि शादी-विवाह एवं अन्य सामाजिक समारोहों में जहां तक संभव हो, प्राकृतिक रूप से विघटित होने वाली पत्तल एवं दोने तथा पर्यावरण हितैषी सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे समारोहों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे में कमी लाई जा सकती है।

कुचामन में प्रतिदिन निकलने वाला कचरा बड़ी चुनौती

डॉ. चौधरी ने बताया कि कुचामन शहर में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है और डंपिंग यार्ड में कचरे के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके संग्रहण, परिवहन एवं निस्तारण पर सरकार को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यदि नागरिक कचरा कम करें और घर से ही उसका पृथक्करण शुरू कर दें तो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ इस पर होने वाले सरकारी व्यय को भी कम किया जा सकता है।

5R को जीवनशैली में अपनाएं

इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संबंधी कार्यों से जुड़े डॉ. भंवरलाल गूगड़ ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में कचरा प्रबंधन की कम से कम एक तकनीक अवश्य अपनानी चाहिए।

उन्होंने कचरा प्रबंधन के सरल एवं प्रभावी सूत्र 5R को समझाते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को Refuse – अनावश्यक वस्तु को लेने से मना करें, Reduce – वस्तुओं एवं प्लास्टिक का उपयोग कम करें, Reuse- वस्तुओं का बार-बार पुनः उपयोग करें, Repurpose – पुरानी वस्तु को किसी नए उपयोग में लें तथा Recycle – उपयोग के बाद सामग्री को पुनर्चक्रण के लिए भेजें।

डॉ. गूगड़ ने कहा कि कचरा प्रबंधन में सबसे पहला प्रयास यह होना चाहिए कि अनावश्यक प्लास्टिक को स्वीकार ही न किया जाए। यदि लेना आवश्यक हो तो उसका उपयोग कम किया जाए। जो वस्तु उपयोग में आ चुकी है, उसे फेंकने के बजाय दोबारा अथवा किसी अन्य उपयोग में लिया जाए और अंत में उसे रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई पॉलीथिन पहले ही हमारे पास आ गई है तो उसे एक बार उपयोग करके फेंकने के बजाय बार-बार सामान लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से कचरे की मात्रा को काफी कम किया जा सकता है।

विद्यार्थियों ने दिखाए नवाचार, पूछे पर्यावरण से जुड़े सवाल

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने अपने स्तर पर किए गए कचरा प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी नवाचारों के बारे में डॉ. प्रदीप चौधरी को अवगत कराया। विद्यार्थियों ने कचरे के पुनः उपयोग, प्लास्टिक के विकल्प, कचरा पृथक्करण तथा कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे।

डॉ. चौधरी ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्हें समझाया कि कचरा समस्या तभी बनता है, जब हम उसे बिना पृथक्करण के इधर-उधर फेंक देते हैं। यदि कचरे को स्रोत पर ही अलग कर दिया जाए तो उसका बड़ा हिस्सा पुनः उपयोग अथवा पुनर्चक्रण के माध्यम से संसाधन में बदला जा सकता है।

कार्यशाला के पश्चात प्रभारी सुमन चौधरी के निर्देशन में विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा पर्यावरण एवं जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली में विद्यार्थियों ने “सिंगल यूज प्लास्टिक हटाओ”, “वर्षा जल बचाओ”, “जल संरक्षण अपनाओ” सहित अनेक पर्यावरण एवं जल संरक्षण संबंधी नारे लगाए।

रैली विद्यालय से रवाना होकर गोल प्याऊ एवं सब्जी मंडी होते हुए पुनः विद्यालय पहुंची। विद्यार्थियों ने मार्ग में लोगों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पुराने जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। रैली के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण करना और पारंपरिक जल संसाधनों को बचाना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

विद्यार्थियों को दिलाया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती मंजू चौधरी ने कहा कि डॉ. प्रदीप चौधरी द्वारा दी गई पर्यावरण संबंधी जानकारी विद्यार्थियों के जीवन के लिए अत्यंत सार्थक एवं उपयोगी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार अथवा किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्राचार्य मंजू चौधरी ने विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया कि प्रत्येक विद्यार्थी सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करेगा, कचरा इधर-उधर नहीं फेंकेगा, कचरे को अलग-अलग एकत्रित करेगा तथा अपने घर एवं आसपास के लोगों को भी कचरा कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।

उन्होंने मुख्य वक्ता डॉ. प्रदीप चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल जानकारी ही नहीं देतीं, बल्कि उनके व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य भी करती हैं।

इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य डॉ. भंवरलाल गूगड़, हाकिम अली खान, सीमा मेहरोलिया, आर्टिस्ट रामस्वरूप जाट सहित विद्यालय का संपूर्ण स्टाफ तथा नगर परिषद के कचरा निस्तारण से संबंधित कार्मिक उपस्थित रहे।

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