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नावां: मारोठ में वर्धमान सागर महाराज ससंघ का स्वागत, धर्ममय माहौल में निकली भव्य शोभायात्रा

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नावां शहर. निकटवर्ती ग्राम मारोठ में सकल जैन समाज के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक और धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा। आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ का मारोठ में भव्य मंगल प्रवेश कलश यात्रा एवं विशाल शोभायात्रा के साथ हुआ।

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नगर के प्रमुख मार्गों से निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मध्वज, मंगल कलश और बैंड-बाजों के साथ शामिल हुए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे नगर में जयघोष और भक्ति का वातावरण बना रहा।

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मंगल प्रवेश के उपरांत आयोजित धर्मसभा में आचार्य ने अपने मंगल प्रवचनों में अहिंसा, संयम, सेवा और जीवदया के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उन्होंने मारोठ जैन समाज द्वारा संचालित जीव दया पालक समिति (बकरशाला) की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि जो समाज मूक प्राणियों के जीवन की रक्षा करता है, वही वास्तविक अर्थों में धर्म का पालन करता है। जीवों को जीवन देने से बड़ा कोई पुण्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मारोठ जैन समाज का यह सेवा कार्य पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत है।

धर्मसभा में हुए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान

धर्मसभा में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट, पाद प्रक्षालन तथा श्रद्धापूर्वक महाआरती का आयोजन किया गया। सभी कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन के साथ संपन्न हुए। प्रवचन पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।

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आचार्य के मंगल प्रवेश को लेकर नगर में उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाओं ने मंगलगीत गाए, युवाओं ने शोभायात्रा की व्यवस्थाओं का दायित्व संभाला तथा समाज के वरिष्ठजनों ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन में सीकर, जयपुर, कुचामन, नावां सहित आसपास के अनेक गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

इन श्रद्धालुओं को मिला विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का सौभाग्य

मारोठ जैन मुनि सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि चित्र अनावरण का सौभाग्य संदीप जैन गोधा (मकराना), दीप प्रज्वलन का सौभाग्य नेहरू पहाड़िया (कुचामन), पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सुभाष चंद्र बड़जात्या (जयपुर) परिवार, महाआरती का सौभाग्य विमल कुमार-निर्मल कुमार बिंदायकया (मारोठ) परिवार तथा शास्त्र भेंट का सौभाग्य सपना देवी, शुभम कुमार एवं दीपक कुमार पाटनी परिवार (मारोठ) को प्राप्त हुआ।

चारों मंदिरों को बताया अतिशय क्षेत्र के समान

आचार्य ने मारोठ के चारों जैन मंदिरों के दर्शन कर कहा कि यहां के चारों मंदिर किसी अतिशय क्षेत्र से कम नहीं हैं। एक तीर्थ क्षेत्र की यात्रा करने के समान ही इन चारों मंदिरों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

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