कुचामन सिटी में अपर जिला एवं सेशन न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पार्किंग व्यवस्था में कोई ठोस सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।


हालात यह हैं कि कई विवाह स्थलों के बाहर आज भी सड़कों पर बेतरतीब वाहन खड़े दिखाई दे रहे हैं। जिससे आमजन और आसपास के रहवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि संबंधित स्थलों पर औपचारिकता निभाते हुए पार्किंग के बोर्ड तो लगा दिए गए हैं। लेकिन वास्तविकता में पार्किंग की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। नतीजतन, सड़कें संकरी हो रही हैं, यातायात बाधित हो रहा है और कई जगहों पर जाम जैसी स्थिति भी बन रही है।

स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता :-
कोर्ट के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर न तो सख्त निगरानी की जा रही है और न ही नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही देर रात तक विवाह स्थलों और कार्यक्रमों में लाउड स्पीकर अब भी बज रहे हैं। न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद रात 10:00 बजे के बाद भी तेज आवाज में साउंड सिस्टम चल रहे हैं। कोर्ट ने मोबाइल डीजे को जप्त करने के भी निर्देश दिए थे। लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक मोबाइल डीजे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

पिछले महीने हुए थी सुनवाई :-
दरअसल यह मामला उस समय सामने आया था जब मानवाधिकार सुरक्षा संगठन, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल काछवाल की ओर से न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक ने कोर्ट को अवगत कराया था कि कुचामन क्षेत्र में कई विवाह स्थलों पर पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण आसपास के निवासियों को निरंतर असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इस पर सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल के समक्ष डीटीओ मनोज शर्मा, सीआई सतपाल सिंह, नगर परिषद के राजस्व अधिकारी सहित विभिन्न विवाह स्थलों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए थे।
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि 19 मार्च तक सभी संबंधित स्थल संचालक उचित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करें और इसकी प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें।
कुचामन कोर्ट ने वाहनों पर लगे डीजे जब्त करने और विवाह स्थलों के संचालन को लेकर दिए निर्देश
साथ ही प्रशासन को भी निर्देशित किया गया था कि वह इन आदेशों की पालना सुनिश्चित करवाए। लेकिन अभी की स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा है कि कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना हो रही है। व्यवसायी ही नहीं, बल्कि प्रशासन भी कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है।
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