कुचामन इन दिनों मानो आग की भट्टी की तरह तप रहा है। यहां का तापमान कई बड़े शहरों से भी ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। आज तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हालांकि बढ़ती गर्मी के कारणों से वे लोग अनभिज्ञ नहीं हैं जो पर्यावरण से जुड़े हैं।


इस बढ़ती गर्मी का मुख्य कारण प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ और पेड़ों की कटाई को माना जा रहा है।

शहर में वर्षों पुराने बड़े-बड़े पेड़ों को हटाया और काटा जा रहा है। रास्ते में इसी का एक उदाहरण देखने को मिला – कुचामन सिटी की बीड़ गौशाला के पास स्थित गोविंद पैलेस परिसर में एक कई साल पुराना बरगद का पेड़ है। यह पेड़ लंबे समय से वहां खड़ा है। लेकिन हाल ही में देखा गया कि इसका एक हिस्सा पूरी तरह से जला हुआ है। बताया जा रहा है कि पैलेस परिसर में ही किसी ने सूखे पत्ते या कचरा जलाया जिसकी वजह से पेड़ को गंभीर नुकसान पहुंचा।
अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ महीनों में इस पेड़ को भी उखाड़ दिया जाएगा।

ऐसे पुराने और विशाल पेड़ों को संरक्षण की सख्त जरूरत है। पहले शहर की कई सार्वजनिक जगहों पर इस तरह के बड़े पेड़ मौजूद थे जो लोगों को छाया देने के साथ-साथ तापमान को भी नियंत्रित रखते थे लेकिन अब विकास के नाम पर इन्हें हटाया जा रहा है।
तापमान में लगातार हो रही वृद्धि की बड़ी वजह यही पेड़ों की कटाई है। प्रकृति खुद इन बड़े पेड़ों को एक लंबी उम्र देती है और जब तक ये जीवित रहते हैं तब तक इंसान के जीवन को संवारते हैं। लेकिन आज इंसान सजावटी और छोटे पौधों के चक्कर में इन पुराने पेड़ों की बलि दे रहा है जो पर्यावरण के लिए कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

राज्य स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर सवाल उठते रहे हैं :-
राजस्थान में लाखों की संख्या में पेड़ काटे गए वहीं नावां क्षेत्र में भी पूरा जंगल साफ कर दिया गया। इसके साथ ही “हरियालो राजस्थान” नाम से एक अभियान चलाया गया जिसमें पूरे प्रदेश में पौधे लगाने का दावा किया गया। हालांकि इस अभियान में 100 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले के आरोप भी सामने आए हैं जिससे इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
यदि पर्यावरण और पेड़-पौधों को नहीं बचाया गया और कटाई के बाद पर्याप्त संख्या में नए पेड़ नहीं लगाए गए तो तापमान में इस तरह की बढ़ोतरी लगातार जारी रहेगी।
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