डीडवाना-कुचामन जिले के नावां से सटी एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की सांभर झील में इन दिनों फिर विदेशी मेहमान कहे जाने वाले प्रवासी पक्षियों पर 2019 के बाद एक बार फिर मौत के काले बादल मंडराने लगे हैं।


सांभर साल्ट क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों की लगातार मौत हो रही है। इन सभी मामलों में सांभर सॉल्ट लिमिटेड की लापरवाही सामने आ रही है। साथ ही कहा जा रहा है कि इसके कर्मचारियों ने पहले ही काफी मरे हुए पक्षियों को जला दिया, ताकि मौत के आंकड़े छुपाए जा सकें।

आज शनिवार उप वन संरक्षक ख्याति माथुर ने नावां पहुंचकर झील का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया।

इस दौरान वन विभाग, सांभर साल्ट, नगरपालिका, तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम, पर्यावरण विभाग सहित विद्युत विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

माथुर ने पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से पक्षियों की होने वाली मौतों के कारण के बारे में जानकारी ली और उनके बचाव के उपाय की समीक्षा की।
अतिरिक्त कलक्टर ने बताई सांभर साल्ट लिमिटेड की लापरवाही
कुचामन एडीएम राकेश गुप्ता ने सांभर साल्ट के अधिकारियों को सख्ती से निर्देशित करते हुए कहा कि इन पक्षियों की सुरक्षा का सबसे पहला जिम्मा सांभर साल्ट का है। सांभर साल्ट द्वारा ही पानी को जगह-जगह रोकने के लिए अवरोधक स्थापित किए गए हैं, जिनके कारण पानी के ठहराव पर एल्गी जमा हो जाती है और उसी के कारण बैक्टीरिया पनप रहा है।
झील क्षेत्र का ड्रोन की मदद से निरीक्षण किया जाएगा, साथ ही पशु चिकित्सा विभाग द्वारा मृत पक्षियों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। पानी में रासायनिक मिश्रण भी एक बड़ा कारण बताया गया है।
नावां एसडीएम बोलीं – सांभर साल्ट के खिलाफ होगी कार्यवाही
प्रवासी पक्षियों की निगरानी व उनकी जांच के लिए 10 टीमें बनाई गई हैं। SDM दिव्या सोनी ने सांभर साल्ट के अधिकारियों को अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर उनका पूरा सहयोग करने के लिए निर्देशित किया, साथ ही कहा कि यदि सांभर साल्ट का सहयोग नहीं रहा तो सांभर साल्ट के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। घायल प्रवासी पक्षियों के लिए मिठड़ी में रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है।
विभाग अलर्ट मोड पर – झील क्षेत्र में हो रही प्रवासी पक्षियों की मौत को लेकर राज्य सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित विभाग अलर्ट मोड पर हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि मौतों के आंकड़ों को रोका जा सके। उप वन संरक्षक ख्याति माथुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सांभर साल्ट रिफायनरी के पास से पर्यावरण विभाग द्वारा सैंपल लिए गए हैं, जो जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।
मुख्य वन संरक्षक की अध्यक्षता में लिए महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्य वन संरक्षक ख्याति माथुर की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में निर्णय लिया गया कि अब सांभर साल्ट क्षेत्र को 8-10 जोनों में बांटकर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इन सभी जोनों में कैमरों व ड्रोन की मदद से नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि परिंदों के स्वास्थ्य, जल की गुणवत्ता और पर्यावरणीय स्थितियों पर लगातार नजर रखी जा सके।
बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रतिदिन तापमान के अनुसार आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण नियमित रूप से किया जाएगा, जिससे परिंदों को प्रभावित करने वाले किसी भी असामान्य परिवर्तन का समय रहते पता लगाया जा सके।
मुख्य वन संरक्षक ख्याति माथुर ने बताया कि सांभर साल्ट क्षेत्र से पानी के सैंपल विशेष तौर पर जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, ताकि पानी में किसी भी प्रकार के प्रदूषण या रासायनिक असंतुलन की पुष्टि हो सके। इसके साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
वन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त दल ने सांभर साल्ट क्षेत्र के साथ-साथ सांभर झील का दौरा किया और स्थल पर मौजूद परिस्थितियों का जायजा लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्ययोजना प्रवासी परिंदों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और पिछले वर्षों जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
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