कुचामन सिटी. भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में मिट्टी को सोने का रूप माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मिट्टी में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए महिलाएं धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर पीली मिट्टी, जिसे सोने की मिट्टी कहते हैं, उसे घर में लेकर आती हैं।


फिर इससे घर की चौखट और आंगन को लीपा जाता है। यही परंपरा कुचामन सहित आसपास के क्षेत्रों में आज भी चली आ रही है।


डीडवाना-कुचामन के कुचामन सिटी सहित आसपास के गांवों में शनिवार को धनतेरस पर्व उल्लास एवं श्रद्धा से मनाया गया। धनतेरस पर्व को लेकर महिलाओं ने शनिवार सुबह बाहर जंगल या रेत के टीले पर जाकर धरती व धनदेवी माता की विशेष पूजा-अर्चना की। वहां से मिट्टी खोदकर बर्तन में भरकर आंवले के फूलों से सजा घर लेकर आईं। कुचामन सहित कई गांवों में इस परंपरा का निर्वहन सदियों से किया जा रहा है।

धनतेरस के दिन लोग घर में चांदी, सोना और बर्तन लाते हैं, लेकिन राजस्थान में धनतेरस के दिन कुछ अलग ही परंपरा नजर आती है। डीडवाना-कुचामन जिले में महिलाएं सूर्योदय से पहले खाली बर्तन लेकर घर से निकलती हैं और मिट्टी की पूजा कर पीले सोने के रूप में अपने साथ मिट्टी ले आती हैं।
मान्यता है कि पीली मिट्टी में लक्ष्मी का वास होता है। घर में जितनी मिट्टी लाई जाएगी, उतना ही लक्ष्मी का प्रवेश होगा और धन-संपदा आएगी। दिवाली से पहले आने वाले धनतेरस पर्व पर कुचामन के हिंदू समाज में मिट्टी को पवित्र मानकर उसकी पूजा की जाती है।
इस दौरान मुनिया जांगिड़, सुशीला जोशी, मुन्की कंवर, सीमा सेन, ललिता वर्मा, ममता सोनी, संतोष पाराशर, विमला टेलर, अलका जोशी, कंचन सेन, पुष्पा गौड़, मंजू शर्मा सहित सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं।






