कुचामन सिटी: भीषण गर्मी में दीपपुरा पंचायत में गहराते पेयजल संकट के बीच कुचामन में गुरुवार को एक अनोखा और गांधीवादी विरोध देखने को मिला। इस अनोखे प्रदर्शन को “मटकी जल-सत्याग्रह” नाम दिया गया।


ग्राम पंचायत दीपपुरा स्थित डुकिया पेट्रोल पंप के पीछे बसी दलित बस्ती में लंबे समय से बने हुए भीषण पेयजल संकट को लेकर गुरुवार को भगतसिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष एवं विश्व जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष परसाराम बुगालिया तथा रेगर समाज सह सचिव महेश जाटोलिया ने अनोखे अंदाज में “मटकी जल-सत्याग्रह” करते हुए PHED कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों को मटकी से पानी पिलाया और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज करवाया।

इस दौरान ग्रामीण कनिष्ठ अभियंता को पानी की बोतल देकर ज्ञापन सौंपकर तत्काल स्थायी समाधान की मांग की गई। ज्ञापन में बताया गया कि दीपपुरा की दलित बस्ती में लंबे समय से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। इसके बावजूद पंचायत द्वारा ग्रामीणों से 1200 से लेकर 2000 रुपए तक राशि वसूली गई। कई घरों में आज तक नल कनेक्शन नहीं लगाए गए और जहां लगाए गए, वहां पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। साथ ही ग्राम पंचायत क्षेत्र के कई सरकारी ट्यूबवेल, हैंडपंप एवं जल पॉइंट लंबे समय से बंद पड़े हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि इस समस्या को लेकर पूर्व में जिला कलेक्टर, तहसीलदार, एसडीएम, PHED विभाग, पंचायत समिति, मानव अधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग एवं जलदाय मंत्री तक को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।

परसाराम बुगालिया ने कहा कि यह बोतल कोई सम्मान नहीं, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने का प्रतीक है। जब दलित बस्ती के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हों और विभाग योजनाओं के दावे कर रहा हो, तब प्रतिकारात्मक रूप से पानी की बोतल भेंट करना मजबूरी बन जाता है। यह “मटकी जल-सत्याग्रह” जनता की पीड़ा को अहिंसात्मक तरीके से प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जब दलित बस्ती के लोग भीषण गर्मी में पानी के लिए परेशान हों और सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाएं, तब व्यवस्था को जगाना जरूरी हो जाता है। हम अधिकारियों को पानी पिलाकर यह संदेश दे रहे हैं कि जनता की मूल समस्या को गंभीरता से लिया जाए।
महेश जाटोलिया ने कहा कि पानी जनता का अधिकार है, कोई एहसान नहीं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि दलित बस्ती में तत्काल स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, बंद पड़े ट्यूबवेल एवं हैंडपंप चालू करवाए जाएं तथा हर घर नल योजना में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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