कुचामन सिटी। नाबालिग बालिका उर्मिला कुमावत के अपहरण मामले में स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता और थानाधिकारी कुचामन की कार्यशैली को लेकर कुमावत समाज ने गंभीर आरोप लगाए हैं।


संघर्ष समिति के सदस्य सत्यनारायण जायलवाल (अध्यक्ष, कुमावत युवा शक्ति), मोहन लाल घोड़ेला (सचिव, कुमावत विकास समिति), ओमप्रकाश बारवाल (उपाध्यक्ष, कुमावत विकास समिति) एवं किशन मारवाल ने अजमेर वृत के महानिरीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में बताया कि दिनांक 27.08.2025 को सुबह 11 बजे नाबालिग बालिका प्रसाद लेने घर से गई थी, तभी मुलजिम कमल चौधरी पुत्र मोहनराम चौधरी और दिनेश पुत्र गंगाराम ने सफेद रंग की मारुति सिफ्ट गाड़ी (सं. RJ37CB5112) लेकर उसे जबरन गाड़ी में डालकर अपहरण कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों की सूचना पर परिवारजन ने दोपहर 1 बजे पुलिस थाना कुचामन सिटी में लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसकी FIR सायं 6:22 बजे दर्ज की गई। तब तक अभियुक्त कुचामन सिटी के आसपास था और मोबाइल चालू था। पुलिस अधिकारी को बार-बार कहने के बावजूद कोई दबिश नहीं दी गई और रात 11 बजे के बाद अभियुक्त फरार हो गए।
थानाधिकारी ने नहीं की कार्रवाई
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि सर्किल इंस्पेक्टर सतपाल चौधरी द्वारा दिनांक 27.08.2025 को वापस थाने का चार्ज संभालने के बाद भी प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई।

लगभग सात दिन बाद उपखंड अधिकारी कुचामन ने थानाधिकारी की कार्यशैली से असंतोष व्यक्त करते हुए दिनांक 04.09.2025 को ज्ञापन प्रस्तुत किया। ज्ञापन देने के समय थानाधिकारी कुचामन ने आश्वासन दिया कि आगामी दो दिनों में प्रगति रिपोर्ट समाज के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
लेकिन ज्ञापन देने के 48 घंटे व्यतीत होने के बाद प्रतिनिधि मंडल ने थानाधिकारी से संपर्क किया तो संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। प्रतिनिधि मंडल बार-बार थानाधिकारी के चक्कर लगाता रहा।
आहत होकर कुमावत समाज ने दिनांक 10.09.2025 को पुलिस थाना कुचामन सिटी के सामने हजारों लोगों के समर्थन में धरना दिया। पूरे दिन व्यतीत होने के बाद सायं 8 बजे पुलिस अधीक्षक डीडवाना-कुचामन धरना स्थल पर पहुंचे और समाज को आश्वासन दिया कि सात दिनों में अपहृत बालिका को दस्तयाब कराया जाएगा।
कुचामन पुलिस थाने के सामने चल रहा कुमावत समाज का धरना हुआ समाप्त
थानाधिकारी की कार्यशैली द्वेषपूर्ण
समिति ने थानाधिकारी कुचामन पर यह आरोप लगाए हैं कि वह प्रभावी नहीं हैं, परिवारजनों को संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं और कहते हैं “यहाँ रोज-रोज क्यों आते हो, चले जाओ यहां से।” समिति का कहना है कि थानाधिकारी की कार्यशैली पूर्ण जातिवाद और द्वेषपूर्ण है। साथ ही अपहरणकर्ताओं को राजनीतिक संरक्षण मिलने की आशंका है, जिस कारण स्थानीय पुलिस प्रशासन मामले को गोलमाल कर रहा है।
समिति ने महानिरीक्षक से मांग की है कि थानाधिकारी कुचामन को तत्काल प्रभाव से हटाकर एक निष्पक्ष और सक्षम अधिकारी से जांच कराई जाए तथा अपहृत नाबालिग बालिका को जल्द से जल्द बरामद कराया जाए।
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