Saturday, June 13, 2026
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कुचामन सिटी: हादसा हुआ तो नहीं बचेगी जान…, कोचिंग में सुरक्षित नहीं हैं स्टूडेंट्स, बिना फायर सेफ्टी के चल रही संस्थाएं

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कुचामन सिटी. दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में फायर सेफ्टी को नजरअंदाज करने के कारण एक बड़ा हादसा हुआ, जिसमें अब तक 22 लोगों की मौत हो गई। बात करें सुरक्षा व्यवस्था की तो शिक्षा नगरी कुचामन में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं।

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यहां हजारों विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रकार की कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

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कुचामन में प्रशासन ने कोचिंग सेंटरों की व्यापक जांच करना भी मुनासिब नहीं समझा है। यहां कई स्कूल और शिक्षण संस्थान बेसमेंट तक में संचालित हो रहे हैं। मुनाफाखोर कोचिंग संचालकों की धूर्तता, सरकारी अमले की अकर्मण्यता और लापरवाही के चलते बच्चों की अमूल्य जिंदगी दांव पर लगी हुई है।

डीडवाना रोड पर बिना फायर सेफ्टी के संचालित हो रहे कोचिंग संस्थान

जरा सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी जो अपने बेटे-बेटियों के भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उनकी हर जरूरत को पूरा करते हैं। जब माता-पिता अपने बच्चों को कोचिंग संस्थानों में पढ़ने के लिए लाते हैं। उस वक्त कोचिंग संचालक बड़े प्यार से कहते हैं कि “अपने बच्चे की तरह ही इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा” लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता है?

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हकीकत यह है कि अधिकांश संस्थान केवल फीस और मुनाफे की भाषा समझते हैं। इसका दृश्य कुचामन की डीडवाना रोड पर स्थित कई कोचिंग संस्थानों में देखा जा सकता है।

100% प्रमोशन, 0% सुरक्षा

इन सभी कॉम्प्लेक्सों में ऊपर या ग्राउंड फ्लोर पर अलग-अलग नामों से कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हुए हैं। जिन पर 100 प्रतिशत चयन और सफलता के दावे किए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सभी संस्थान अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं?

जवाब है – नहीं।

फायर सेफ्टी के नाम पर कुछ भी नहीं

इन कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। दीवारों पर सिर्फ प्रचार-प्रसार के पोस्टर लगे हुए हैं। कई स्थानों पर आने-जाने के रास्ते इतने संकरे हैं कि किसी आपात स्थिति में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का सुरक्षित बाहर निकल पाना मुश्किल हो सकता है।

फायर सेफ्टी तो दूर की बात है। यदि कोई घटना घट जाए तो आग बुझाने के लिए पर्याप्त पानी तक की व्यवस्था कई स्थानों पर दिखाई नहीं देती। सब कुछ सरकारी फायर डिपार्टमेंट पर छोड़ दिया गया है कि हादसा होने पर कॉल करके उन्हें बुला लिया जाएगा। लेकिन तब तक बच्चों की जान सुरक्षित रहेगी या नहीं यह कोई नहीं कह सकता।

जहां तक देखा गया है। इन कोचिंग संस्थानों में एक-दो फायर एक्सटिंग्विशर तक नजर नहीं आते। जबकि आज आधुनिक तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं, जिनसे आग लगते ही अलार्म सक्रिय हो जाता है और प्रारंभिक स्तर पर ही आग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। ऐसे सिस्टम होने पर हर बार फायर ब्रिगेड के पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ता।

NOC कैसे मिली? नहीं मिली तो फिर कैसे चल रहे हैं संस्थान?

नियमों के अनुसार पूर्ण फायर सेफ्टी सिस्टम के बिना एनओसी (NOC) नहीं मिलती। यह नगर परिषद और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। अब वही जानें कि इन संस्थानों को एनओसी कैसे मिली या यदि नहीं मिली तो फिर ये संस्थान किस आधार पर संचालित हो रहे हैं।

सब मिलीभगत का खेल बनकर रह गया है। अधिकारी निरीक्षण के लिए जाते हैं, उनकी मान-मनुहार अच्छे से कर दी जाए तो फिर चाहे जितने कमरे बना लो, चाहे उनमें जितने बच्चों को बैठा दो, सुरक्षा व्यवस्था हो या न हो, उसकी जांच हो या न हो, सब कुछ कागजों में एकदम सही दिखा दिया जाता है।

अभिभावक ध्यान में रखिए :-

माता-पिता को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सजग रहने की आवश्यकता है। बच्चों की जिम्मेदारी किसी और पर डालने से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन कर रहा है या नहीं।

आए दिन आग से जुड़े गंभीर हादसे सामने आ रहे हैं। बसों में आग लगने, इमारतों में आग लगने और भवन गिरने जैसी घटनाओं में कई लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं जहां बच्चों के ऊपर छत तक गिर गई। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है।

मौसम बदलाव के समय जांच की सख्त जरूरत

अब बारिश और आंधी का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि जिन कोचिंग संस्थानों, स्कूलों, हॉस्टलों और अन्य भवनों में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते या रहते हैं। उनकी विशेष जांच करवाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां सभी आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद हों और वे कार्यशील स्थिति में हों।

कुचामन में कई हॉस्टल भी संचालित हैं जहां विद्यार्थियों से अच्छा-खासा किराया वसूला जाता है। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आते।

सरकारी दावों की खुलती पोल

ऐसी स्थितियां उन सरकारी दावों और वादों की भी पोल खोलती हैं, जिनमें कहा जाता है कि प्रशासन सभी व्यावसायिक और अन्य गतिविधियों का संचालन नियम-कानून के दायरे में करवा रहा है। यह भी अफसोस की बात है कि बड़े हादसों के बाद जांच तो होती है, लेकिन उन जांचों के आधार पर क्या कार्रवाई हुई, यह शायद ही कभी स्पष्ट रूप से सामने आ पाता है।

Kuchaman News: स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद, पुलिस, फायर विभाग और अन्य संबंधित विभागों को व्यावसायिक भवनों के निर्माण और संचालन में केवल कागजी कार्रवाई और फाइलों का पेट भरने की बजाय ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ नियम-कानूनों का पालन सुनिश्चित करवाना चाहिए।

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