कुचामन सिटी. बीजेपी से नेता प्रतिपक्ष अनिल सिंह मेड़तिया ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और नगर परिषद आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि बीजेपी को दूसरा मंत्री ढूंढना चाहिए।


अनिल सिंह मेड़तिया ने बताया कि यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को यहां के आयुक्त ने यह सूचना दी थी कि खसरा नंबर 160 पर स्टे है और वह मंत्री वहां से बोलते हैं कि “तुम्हारे तो पूरे कुचामन पे स्टे है” मतलब बिना नॉलेज के आदमी को मंत्री बना रखा है तो दुर्भाग्य है। इसके लिए मैं पत्र लिखूंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को।

मंत्री पर यह भी आरोप लगाया कि वह कांग्रेस से अपनी रिश्तेदारी निभा रहे हैं, महेंद्र चौधरी के परिवार से उनकी रिश्तेदारी है। ऐसे मंत्री को नहीं रखना चाहिए, भारतीय जनता पार्टी को कोई दूसरा मंत्री ढूंढना चाहिए।

कुचामन नगर परिषद में बड़े भ्रष्टाचार – मेड़तिया
उन्होंने कहा कि अभी तक 1700 पट्टों की जांच की है तो मैं उनको साफ-साफ कहना चाहता हूँ कि वो कुचामन पधारें। 10,000 की तो जांच मैं करवा देता हूँ। उनकी जो बढ़ाई हुई है उसके अंदर इतना बड़ा भ्रष्टाचार है जिसकी कोई सीमा नहीं है। इंदिरा रसोई में करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ। पानी के टैंकरों, स्टेशनरी, कुत्तों और सांडों के नाम पर भी घोटाला हो रहा है।

कुल मिला के डीएलबी की जो दुकान है डीएलबी को दुकान बना दिया गया, पूरा चारों तरफ भ्रष्टाचार की दुकान बनी हुई है और नगर परिषद कुचामन सिटी के बहुत बुरे हालत है।
अनिल सिंह मेड़तिया ने कहा कि सालाना 9 करोड़ रुपए सफाई व्यवस्था पर खर्च हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर गंदगी के ढेर में डूबा हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में बड़ा घपला हो रहा है। शहर में कुल 285 सफाई कर्मचारी हैं, फिर भी सफाई की स्थिति बेहद खराब है।
डबल इंजन नहीं, बस धुआं धुआं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि डबल इंजन की सरकार कह के हम लोग कार्यकर्ता प्रचार करते हैं, तो यह डबल इंजन के अंदर से पीएम मोदी वाला इंजन तो पहुँच रहा है जयपुर लेकिन वहाँ से दूसरा इंजन लगते ही सिर्फ वहाँ धुआँ ही निकल रहा है। विकास के काम यहाँ नहीं पहुँच रहे हैं।
नगर परिषद आयुक्त पर बोले – नेतागिरी कर रहा है
उन्हींने कहा कि अभी 17 तारीख से शहरी सेवा शिविर चालू किया जिसमें मात्र एक पट्टा बना है आज की तारीख में। जनता से चक्कर लगवाए जा रहे हैं। एक काम नहीं कर रहे।
बोले जा रहे हैं स्वच्छ भारत बनाएंगे, झाड़ू लगाकर फोटो सेशन कर रहे हैं। इस अधिकारी ने काम नहीं करते हुए नेतागिरी करना ज्यादा उचित समझ रखा है। अधिकारी को कानून की नॉलेज नहीं है, प्रोसिडिंग तक घर पर पहुंचना उचित नहीं समझता जिससे पार्षदों को यह तक पता नहीं कि आगे क्या करना है।
हाईकोर्ट से मिले स्टे पर बोले – मेड़तिया
उन्होंने बताया कि नगर परिषद या नगरपालिका के अंदर समस्त जिम्मेदारी सर्वप्रथम आयुक्त की होती है क्योंकि कानून का विधिक जानकार वही होता है। यह खेल इसलिए भ्रष्टाचार का खेला जाता है कि पहले सभापति को हटाओ।
सभापति स्टे किस आधार पर लेता है? सभापति इसी आधार पर स्टे लेता है कि आयुक्त ने मुझे दस्तखत करके दिए तब मैंने दस्तखत किए। आयुक्त पढ़ा-लिखा होता है, उसे कानून की पूरी जानकारी होती है और यही स्टे का आधार बनता है।







