कुचामन सिटी. डीडवाना-कुचामन जिले सहित राजस्थान के किसानों के लिए बारिश ने दुख और बर्बादी की कहानी लिख दी है। मेहनत से तैयार की गई फसल खेतों में नष्ट होते देख किसानों की आंखों में आंसू छलक रहे हैं, लेकिन वे अपने दर्द को व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं।


किसानों का कहना है कि किसी को बर्बाद होने के लिए सट्टा, जुआ या शराब की आवश्यकता नहीं है, अगर परिस्थितियां अनुकूल न हों तो खेती किसानी भी उन्हें परेशान कर सकती है। इसका उदाहरण क्षेत्र के कई गांवों में देखा जा सकता है। लगातार हुई बारिश ने खेतों में अंकुरित फसलों को नुकसान पहुंचाया है।

गांव गोपालपुरा के किसान परसाराम बुगालिया ने बताया कि कटी हुई फसल बारिश में भीग गई। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग ने अभी तक नुकसान का सर्वे नहीं किया है। बीज, खाद और दवा सभी खरीदी गई, लेकिन अब किसानों के लिए यह भारी कर्ज बन गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि नष्ट हुई फसलों का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए।
कुदरत के कहर से किसान बेहाल
पहले लगातार हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी थी और राहत अब तक नहीं मिली। कटाई के समय फसलें खेतों में पड़ी हैं, जिससे दोहरी मुसीबत खड़ी हो गई है। बारिश ने किसानों के अरमानों को बहा दिया और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

किसान बताते हैं कि इस बार खेती पर काफी लागत लगी थी, लेकिन फसलों के कम दाम और बारिश ने उनके लिए स्थिति और कठिन कर दी। लागत भी पूरी तरह नहीं निकलेगी।
परसाराम बुगालिया ने कहा कि दीपावली के आसपास मौसम का मिजाज खराब कर रहा है। इस वर्ष कुदरत ने जिस तरह से कहर बरपाया है, वह किसान लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने सरकार से फसलों का नुकसान आकलन कर मुआवजा दिलाने की मांग की।
जनजीवन प्रभावित – शहर में जलभराव से लोग परेशान हैं। बारिश ने मुख्य सीकर रोड को प्रभावित किया है। खस्ताहाल सड़क पर गड्डों में भरे पानी के कारण आवागमन कठिन हो गया है। दुकानदारों का कहना है कि नगर परिषद यदि समय रहते सड़क की मरम्मत करती, तो हल्की बारिश में लोगों की परेशानी कम होती।






