कुचामन सिटी नगरपरिषद की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि नगरपरिषद अपने ही मुख्य भवन के सामने की सड़क की मरम्मत तक नहीं कर पा रही।


यह भवन न्यू बस स्टैंड के पास स्थित है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक, टैम्पो और दुपहिया वाहन गुजरते हैं।

बावजूद इसके, तिराहे की सड़क पर गड्ढे और उबड़-खाबड़ सतह नागरिकों के लिए मुसीबत बनी हुई है।


हालांकि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के कुचामन दौरे से पूर्व कुछ गड्ढों को भर दिया गया था, लेकिन मरम्मत इतनी बेढंगी रही कि सड़क पहले से भी ज्यादा खराब हो गई। सीमेंट और मलबे से जैसे-तैसे भराव कर दिया गया, जिससे सड़क और अधिक खतरनाक हो गई है।
फरवरी 2025 में उपमुख्यमंत्री द्वारा बजट विधानसभा में पेश किया गया था, जिसमें राजस्थान के आठ नए जिलों – जिनमें डीडवाना-कुचामन भी शामिल है – को विकास कार्यों के लिए 1000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बजट प्रदान किया गया। इसके अलावा नगरपरिषदों को पारित बजट की मंजूरी, राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं से अनुदान, स्थानीय कर और विभिन्न शुल्कों के माध्यम से भी पर्याप्त धन मिलता है।
साथ ही, बारिश के मौसम में सड़कों की क्षतिग्रस्त स्थिति को सुधारने के लिए भी नगरपरिषद को अलग से विशेष बजट मिलता है।
इसके बावजूद कुचामन सिटी में अब तक नाममात्र का ही विकास कार्य दिखाई दे रहा है। न सिर्फ न्यू बस स्टैंड, बल्कि पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की सड़कों की हालत भी बदहाल बनी हुई है। सीवरेज परियोजना भी अधर में लटकी हुई है, जिससे जगह-जगह खुदाई, कीचड़ और रास्तों की अव्यवस्था से आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
अब अगस्त का महीना शुरू हो चुका है और साल 2025 के खत्म होने में केवल चार महीने ही शेष हैं, ऐसे में अब तक हुए कार्यों की स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है।
साफ-सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमराई हुई है। हाल ही में आए स्वच्छता सर्वेक्षण में कुचामन को 123वां स्थान मिला है, जो नगरपरिषद की जमीनी कार्यक्षमता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
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