कुचामन सिटी. पीएम श्री जवाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुचामन सिटी में अंतरविद्यालयी मेहंदी रचाओ एवं राखी बनाओ प्रतियोगिताओं का एक साथ आयोजन किया गया।

प्रतियोगिताओं में पीएम श्री जवाहर विद्यालय तथा सूरजी देवी राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विद्यार्थियों ने मेहंदी की आकर्षक डिजाइनों तथा विभिन्न प्रकार की रचनात्मक राखियां बनाकर अपनी कलात्मकता, कल्पनाशीलता, बारीकी एवं कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं का निर्णायक मंडल माहेश्वरी महिला मंडल की शकुंतला, आशा झंवर, मंजू करवा एवं सरिता काबरा ने संभाला। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के कार्यों का बारीकी से अवलोकन करते हुए निर्धारित मानदंडों के आधार पर अंक प्रदान किए।
राखी बनाओ प्रतियोगिता में जवाहर स्कूल की नफीसा ने प्रथम, सूरजी देवी विद्यालय की पायल ने द्वितीय तथा जवाहर स्कूल की सानिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

वहीं, मेहंदी रचाओ प्रतियोगिता में सूरजी देवी विद्यालय की असमा ने प्रथम, पीएम श्री जवाहर विद्यालय की कोमल ने द्वितीय तथा सूरजी देवी विद्यालय की तपस्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता छात्राओं को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर माहेश्वरी महिला मंडल की सदस्यों ने अपनी ओर से सभी प्रतियोगियों को पेन देकर पुरस्कृत किया।
प्रतियोगिता की प्रभारी शारदा भाकर ने आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराया। मेहंदी प्रतियोगिता की विशेषता यह रही कि इसमें छात्राओं के साथ छात्रों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल विकास को बढ़ावा मिला।
इस अवसर पर आशा झंवर ने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे रचनात्मक और कौशल आधारित अवसर मिलना बहुत आवश्यक है। राखी बनाना जहां हमारी संस्कृति और भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, वहीं मेहंदी रचाने की कला विद्यार्थियों के लिए भविष्य में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकती है। ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच देने के साथ उन्हें अपनी कला को निखारने का अवसर प्रदान करती हैं।
प्रधानाचार्य मंजू चौधरी ने कहा कि मेहंदी रचाओ और राखी बनाओ जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता, सूक्ष्म कौशल, धैर्य और आत्मविश्वास विकसित करती हैं। पीएम श्री विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवनोपयोगी कौशलों से जोड़ना भी है। यदि विद्यार्थी अपनी कला और हुनर को पहचानकर उसे निरंतर विकसित करें तो यही कौशल आगे चलकर उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है।
कार्यक्रम में उपप्राचार्य डॉ. भंवरलाल गुगड़, हाकीम अली खान, सीमा महरौलिया, मोनिका चौधरी, डॉ. ईश्वर राम बेड़ा, मेहाईराज रत्नू, मीनाक्षी राठौड़, सरोज शेखावत, भंवरलाल बुलडक, राज गोठवाल, कलाकार रामस्वरूप जाट सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहे।






