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कुचामन सिटी: मुनि विकसंत सागर ने णमोकार महामंत्र को बताया सर्वकल्याणकारी, तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक-शान्तिधारा सम्पन्न

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कुचामन सिटी. घाटीकुआ स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में पट्टाचार्य आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि विकसंत सागर महाराज के सानिध्य में जलाभिषेक एवं शान्तिधारा का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से किया गया।

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शान्तिधारा का पुण्यार्जन गुणमाला देवी, कैलाशचंद, निर्मल कुमार, अमित, उमंग एवं अरिहंत पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। धर्मसभा का मंगलाचरण किरण देवी एवं मुन्नी देवी झांझरी ने किया। संतोष कुमार, प्रवीण, विपिन, चिन्मय एवं दिव्य पहाड़िया परिवार ने शास्त्र भेंट किए।

वहीं ललित कुमार, चिरंजी लाल, लेखराज एवं निखिल पहाड़िया परिवार ने पाद प्रक्षालन किया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य विराग सागर महाराज के चित्र के समक्ष लालचंद, संतोष, ज्ञानचंद, अशोक पहाड़िया, पूरणमल, विनोद झांझरी, अशोक अजमेरा, सुरेश कुमार, प्रकाशचंद, मोनू पाटोदी एवं निखिल जैन ने दीप प्रज्ज्वलन किया।

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अपने प्रवचन में उपाध्याय मुनि विकसंत सागर महाराज ने कहा कि सच्चा धार्मिक वही है, जो किसी भी जीव को दुख देने का भाव नहीं रखता। सभी आत्माएं समान हैं तथा मृत्यु और वैराग्य की कोई निश्चित आयु नहीं होती। उन्होंने णमोकार महामंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि यह अनादि, अनंत और सर्वकल्याणकारी मंत्र है।

प्रवचन के पश्चात संतोष पहाड़िया परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए अल्पाहार की व्यवस्था की गई।

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