नावां: मारोठ थाना क्षेत्र के भीवपुरा गांव के पास हुए जानलेवा हमले के मामले में 18 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा।


20 अप्रैल को नावां उपखंड कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन शुरू किया गया।

मंगलवार को उपखंड कार्यालय के सामने आमजन द्वारा अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के दौरान अपने-अपने उद्बोधन दिए गए। बुधवार को कई संगठन व राजनीतिक लोग धरने में शामिल होंगे।
धरने में सैकड़ों महिला व पुरुष शामिल रहे, जिन्होंने “पुलिस प्रशासन हाय-हाय, मुर्दाबाद” के नारे लगाए।

प्रशासन की ओर से धरने के दूसरे दिन ग्रामीणों से कोई समझाइश नहीं की गई, जबकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही धरना समाप्त किया जाएगा।
धारदार हथियारों से जानलेवा हमला :-
मामला यह है कि आरोपियों ने शीशपाल पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया था। ज्ञापन के अनुसार घटना 4 अप्रैल की रात करीब 9:15 बजे की है। भीवपुरा निवासी शिशपाल और रामकुमार अपने निजी वाहन से घर लौट रहे थे। तभी भीवपुरा निवासी राजेंद्र लुहाच, हरेंद्र कुमार, राकेश और गजेंद्र सहित अन्य लोगों ने हथियारों से लैस होकर उनका रास्ता रोक लिया।
आरोपियों ने शिशपाल पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला किया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोटें आईं और पैर में दो फ्रैक्चर हो गए।
हमला इतना भयावह था कि आरोपी शिशपाल को मृत समझकर मौके से भाग गए। घायल शिशपाल वर्तमान में जयपुर के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
ग्रामीणों ने मारोठ पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना की रिपोर्ट 5 अप्रैल को ही दर्ज करा दी गई थी और घायल का मेडिकल मुआयना भी हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस आरोपियों को खुला संरक्षण दे रही है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पुलिस कथित तौर पर राजनीतिक दबाव या अनुचित लाभ के चलते कार्रवाई से बच रही है और आरोपी खुले घूम रहे हैं।
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने जिला कलक्टर के नाम अपनी मांगें एसडीएम के माध्यम से भेजी गई। मांगों में आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित शीशपाल को 30 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, मामला धारा 109 में दर्ज करने सहित कई मांगें रखी गई।
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