कुचामन सिटी. बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने एवं बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से कुचामन शहर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।


यह कार्यक्रम राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डीडवाना-कुचामन के निर्देशानुसार तालुका विधिक सेवा समिति, कुचामन द्वारा संचालित विशेष अभियान के तहत किया गया।

अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश नाहर सिंह मीणा के निर्देशन में अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) और पीपल पूर्णिमा (31 मई 2026) जैसे अवसरों पर होने वाले बाल विवाहों को रोकने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदर लाल खारोल ने उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी, पुलिस अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं एवं अधिकार मित्रों को निर्देशित किया कि ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों के सहयोग से व्यापक जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं।

इसी क्रम में अधिवक्ता दुर्गेश कंवर द्वारा कुचामन शहर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है।
उन्होंने बताया कि कम उम्र में विवाह से बच्चों का बचपन छिन जाता है। विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है। स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और कई बार उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है। यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले तो तुरंत पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दें।
कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बाल विवाह उन्मूलन हेतु समाज को जागरूक करने और इस कुरीति को जड़ से खत्म करने की शपथ ली।
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