कुचामन सिटी. शहर में करोड़ों रुपए की लागत से करवाए गए सीवरेज कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला बालाजी नगर स्थित पारीक कॉलोनी का है। जहां करीब एक वर्ष पहले सीवरेज लाइन डालने के बाद बनाई गई सीमेंट सड़क अब पूरी तरह से उखड़ने लगी है।


सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि सीमेंट और कंक्रीट अलग-अलग होकर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वार्ड नंबर 13 के निवासी रामचंद्र कुमावत ने बताया कि सीवरेज कार्य के दौरान महीनों तक लोगों ने आवागमन में भारी दिक्कतें झेली थीं। लेकिन घटिया निर्माण सामग्री के कारण एक साल के भीतर ही सड़क जवाब दे गई। अब हालात यह हैं कि सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया है और गुजरते वाहनों से उड़ने वाली धूल, मिट्टी और कंक्रीट से आसपास के लोगों को चोट लगने का खतरा बना रहता है।
वहीं स्थानीय निवासी नवनीत दाधीच ने बताया कि दिनभर वाहनों की आवाजाही के कारण इतनी धूल उड़ती है कि घरों में रोज दो-तीन बार सफाई करनी पड़ रही है, जिससे खासकर महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है।


शिकायतों के बावजूद अधिकारियों की अनदेखी, परेशान लोगों ने खटखटाया न्यायालय का दरवाजा
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सीवरेज के कई ढक्कन टूट चुके हैं और कुछ इतने उभरे हुए हैं कि वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
आखिरकार परेशान होकर रामचंद्र कुमावत ने अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक के माध्यम से ताल्लुका विधिक सेवा समिति में प्री-लिटिगेशन याचिका दायर की। इसमें अधीक्षण अभियंता रुडीप और प्रोजेक्ट मैनेजर एल एंड टी पर लापरवाही और गुणवत्ताहीन निर्माण का आरोप लगाते हुए आमजन की समस्या के समाधान की मांग की गई है।
अधिकारियों को नोटिस जारी –
मामले की सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल ने दोनों अधिकारियों को नोटिस जारी कर 7 अप्रैल को आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक का कहना है कि सड़क निर्माण में तय मापदंडों की अनदेखी की गई है। पुरानी सड़क के ऊपर ही नई सीमेंट सड़क बना दी गई, जिससे सड़क का लेवल बिगड़ गया और कई घरों में पानी घुसने की समस्या पैदा हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह का कार्य किया गया, जिसका खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।






