नावां सहित आस-पास का क्षेत्र नमक उद्योग में अपनी एक पहचान बनाए हुए है। लेकिन यहाँ के व्यापारी नमक में भी काला बाज़ारी करते हुए नज़र आते हैं।


झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ की सरकार की ओर से आमजन को निःशुल्क नमक वितरण किया जाता है।

गुजरात के नमक की गुणवत्ता नावां के नमक से कुछ ज़्यादा अच्छी है। इसलिए झारखंड सरकार की ओर से गुजरात में संचालित नमक रिफाइनरी JK Salt के संचालक की ओर से निःशुल्क नमक वितरण योजना के तहत टेंडर लिया गया।
झारखंड सरकार की ओर से मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना के तहत गुजरात के शातलपुर में स्थित जेके साल्ट प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर जारी किया गया। लेकिन यह नमक नावां के रेलवे साइडिंग के पास स्थित भगवती केम फूड से भरकर रैक में लोड कर झारखंड भेजा जा रहा है। शहर के रेलवे साइडिंग से गुरुवार को यह रैक भरकर रवाना हुई।


इस नमक की गुणवत्ता इतनी कम है कि नमक में कंकर की मात्रा बहुत ज़्यादा है और अशुद्धियाँ साफ देखी जा सकती हैं। नमक उद्यमियों की ओर से सरकार से मोटा मुनाफा लेकर गुजरात के बजाय नावां से भरवाया जा रहा है। नमक उद्यमी ज़्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में सरकार की आँखों में नमक डाल रहे हैं। गुजरात की फर्म के नाम गुजरात का नमक लदान करने का टेंडर लेकर नावां का अशुद्ध नमक भरा जा रहा है।
भाड़े में अंतर, इसलिए नावां से लदान :-
गुजरात से झारखंड नमक भेजने में नमक का भाड़ा अधिक है। वहीं यदि यह नमक नावां से भेजा जाए तो रेलवे भाड़ा कम है। झारखंड सरकार से पूरा भाड़ा लेने के बाद नमक उद्यमी रेलवे भाड़े में भी मोटी कमाई कर रहे हैं।
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