नावां (डीडवाना-कुचामन). सांभर लेक क्षेत्र में एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की रहस्यमयी मौत ने वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।


लगातार दो दिनों में झील के आसपास करीब 15 किलोमीटर के दायरे में 20 मृत पक्षी मिले हैं, जबकि 13 पक्षियों को जीवित अवस्था में रेस्क्यू कर मीठड़ी स्थित एनिमल हसबेंडरी विभाग के रेस्क्यू सेंटर में इलाज के लिए भेजा गया है।


दरअसल, शुक्रवार को वन विभाग की टीम और पर्यावरण विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से झील क्षेत्र में सर्च और रेस्क्यू अभियान चलाया। मृत मिले सभी पक्षियों के सैंपल लेकर उन्हें विशेषज्ञों की निगरानी में डिस्पोज (जला) कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में पक्षियों की मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन विभाग ने बर्ड फ्लू या पानी में किसी रासायनिक प्रदूषण की संभावना से भी इंकार नहीं किया है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि झील क्षेत्र में संचालित कुछ रिफाइनरियों के कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में मृत पक्षियों को पहले ही हटा कर जला दिया, जिससे सही आंकड़ा सामने नहीं आ सका। लोगों का कहना है कि घटना की जानकारी मिलते ही सांभर साल्ट लिमिटेड के कर्मचारियों ने रातों-रात पक्षियों के शवों को इकट्ठा कर नष्ट कर दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई – प्रवासी पक्षियों की मौतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब SDRF की टीम को झील क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन के लिए लगाया है। यह टीम अगले कुछ दिनों तक झील के आसपास गश्त करेगी ताकि मृत या बीमार पक्षियों को तुरंत रेस्क्यू किया जा सके। वहीं वन विभाग ने विशेषज्ञों के साथ मिलकर सैंपल जांच रिपोर्ट आने तक क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।






