कुचामन सिटी. टैगोर महाविद्यालय में हिंदी दिवस बड़े ही उत्साह और गरिमामयी वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर साहित्यिक रंगों से सराबोर रहा।


पूरे महाविद्यालय परिवार ने हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा, इसकी साहित्यिक धारा और सांस्कृतिक गौरव का हृदयस्पर्शी उत्सव मनाया। कार्यक्रम का आयोजन छात्रों और प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी से हुआ, जिसमें कविता पाठ, भापण, ड्रामा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को हिंदी के महत्व का गहन अनुभव कराया।

सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच पर महाविद्यालय के निदेशक सीताराम चौधरी, सचिव राजेश चौधरी और प्राचार्य डॉ. पी.एस. चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर हिंदी दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर छात्रा खुशबू ने सरस्वती वंदना पर एक सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने पूरा वातावरण पुलकित कर दिया।
निदेशक बोले – हिंदी देश की आत्मा
निदेशक सीताराम चौधरी ने कहा कि “हिंदी केवल एक भाषा नहीं बल्कि हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। यह हमारे देश की आत्मा है, जो उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक लोगों को एक सूत्र में पिरोती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम हिंदी को केवल बोलचाल की भाषा न मानकर इसे अपनी शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक भाषा के रूप में भी सशक्त बनाएं।”

उन्होंने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि हिंदी को तकनीक से जोड़कर आगे बढ़ाया जाए, ताकि यह वैश्विक स्तर पर समान रूप से मान्यता प्राप्त करे।
सचिव ने कहा – मातृभाषा के सम्मान के बिना राष्ट्र की प्रगति नहीं
सचिव राजेश चौधरी ने कहा कि “हिंदी दिवस हमें स्मरण कराता है कि मातृभाषा का सम्मान किए बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। जिस प्रकार जापान ने जापानी भाषा को आधार बनाकर तकनीकी विकास किया और जर्मनी ने जर्मन भाषा में ज्ञान-विज्ञान का विस्तार किया, उसी प्रकार हमें भी हिंदी के माध्यम से ज्ञान के हर क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को रोजगार और प्रतिस्पर्धा से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
प्राचार्य डॉ. पी.एस. चौहान ने कहा कि “यह दिन हमें स्मरण कराता है कि हिंदी हमारी पहचान है और हमें गर्व है कि हम उस भाषा से जुड़े हैं जो विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में शामिल है।”
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कविता पाठ में खुशबू, मानस, मोनिका, यास्मीन ने कविताओं का पाठ कर वातावरण को काव्यमय बनाया। आरुपि, प्रियंका, देव, पूजा एवं खुशबू ने पोस्टर्स के माध्यम से हिंदी दिवस की झलकियां प्रदर्शित कीं।
खुशबू एवं ग्रुप तथा रमेश एवं ग्रुप ने ड्रामा प्रस्तुत किया। भाषण प्रतियोगिता में भावना, देव एवं चंचल ने प्रभावशाली वक्तव्य दिए।
महाविद्यालय के प्रवक्ता कमलेश कुमार जाट ने छात्रों को मार्गदर्शन देते हुए हिंदी की महत्ता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल साहित्य की भाषा नहीं बल्कि विज्ञान, तकनीक, पत्रकारिता, विधि और व्यापार की भी सशक्त भाषा बन सकती है। उन्होंने 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में अंगीकार किए जाने का ऐतिहासिक निर्णय भी बताया।
हिंदी के प्रचार-प्रसार का लिया संकल्प
इस अवसर पर पूरे महाविद्यालय परिवार ने यह संकल्प लिया कि वे हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना सक्रिय योगदान देंगे और इसे राष्ट्रीय विकास की धारा से जोड़ेंगे। समारोह में भोमाराम, डॉ. मुकेश बगड़िया, सुनीता चौधरी, विमला, कमलेश कुमार जाट, अब्दुल अजीज, बुद्धाराम, अब्दुल मुस्तफा, आरती कनोई, विष्णु प्रसाद जोशी, लक्ष्मीकांत तिवारी, कैलाश महला, नानूराम, प्रिया, बाबूलाल की गरिमामय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन छात्रा कृतिका शर्मा एवं नेहा माथुर ने किया।
कुचामन सिटी के नए उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा, रह चुके हैं नावां के एसडीएम






