कुचामन सिटी. भांवता गांव में स्थित प्राचीन तेजाजी का मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक माना जाता है। यहां तेजाजी महाराज की देवली स्थित है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि तेजा दशमी पर खोपरा (नारियल) चढ़ाने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। लोग अपनी श्रद्धा अनुसार खोपरा, नारियल, मिठाई और अगरबत्ती लेकर मंदिर पहुंचते हैं।


सांप के दर्शन से जगी आस्था
श्रद्धालुओं ने बताया कि लगभग तीन साल पहले तेजा दशमी से पूर्व नवमी की रात्रि को दयालराम कुमावत के घर में सांप निकला था। उस समय ओमप्रकाश मेघवाल ने आस्था से तेजा बाबा का जयकारा लगाकर सांप को अपने हाथ पर बिठाया और थाली में विराजमान कर मंदिर में छोड़ दिया।

आश्चर्य की बात यह रही कि वह सांप मंदिर में दो-तीन घंटे रहा और फिर विलुप्त हो गया। इसी तरह इस बार भी नवमी की रात्रि को मूलाराम मेघवाल के घर में सांप आया। ओमप्रकाश मेघवाल को सूचना दी गई। उन्होंने भी श्रद्धा से सांप को अपने हाथ पर बैठाकर थाली में रखा और डीजे के साथ जुलूस निकालकर गांव से 4 किलोमीटर दूर ढाणी से प्राचीन तेजा मंदिर में लाकर छोड़ा। उस दौरान ग्रामीण डीजे की धुन पर नाचते-झूमते मंदिर पहुंचे और सांप पूरी रात मंदिर में रहा।


राज्य मंत्री विजय सिंह पहुंचे दर्शन करने
तेजा दशमी के दिन दोपहर करीब 2 बजे मंत्री विजय सिंह गांव पहुंचे और तेजाजी महाराज के दर्शन किए। इस अवसर पर ओमप्रकाश मेघवाल ने सांप को अपने हाथों में लेकर मंत्री विजय सिंह को भी दिखाया। मंत्री ने आस्था की सराहना करते हुए सम्मानस्वरूप अपना साफा ओमप्रकाश को पहना दिया।
इस मौके पर गजेंद्र सिंह राठौड़, नानूराम मेघवाल, सजन कुमार मेघवाल, भैरूराम मायला, राष्ट्रीय हस्तशिल्पी मदन मेघवाल, मूलाराम मेघवाल, पूर्व सरपंच अमराराम मेघवाल, माधु कुमावत, जीवनराम मेघवाल, भंवर सिंह शेखावत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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