कुचामन सिटी में नगर परिषद की ओर से जर्जर मकानों और भवनों को लेकर की गई कार्रवाई महज खानापूर्ति तक सीमित रह गई है।


लगभग एक महीने पहले शहर में 20 से अधिक जर्जर भवनों पर नोटिस चिपकाए गए थे। जिनमें स्पष्ट रूप से लिखा गया था कि “यह मकान जीर्णशीर्ण अवस्था में है। इसके नजदीक जाने से कोई भी दुर्घटना घटित हो सकती है। अतः इसके नजदीक जाना मना है। निवेदक: नगर परिषद, कुचामन सिटी।”


इन नोटिसों में चेतावनी दी गई थी कि ये भवन असुरक्षित हैं और इन्हें तोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन नोटिस चिपकाने के बाद नगर परिषद ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। न तो इन भवनों का निरीक्षण किया गया, न ही इन्हें ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। नतीजतन शहरवासियों की जान जोखिम में है और प्रशासन की लापरवाही साफ झलक रही है।
ऐसा लग रहा है कि नगरपरिषद प्रशासन शहरवासियों की समस्याओं को दरकिनार कर सिर्फ़ गद्दी किसकी होगी, इसी राजनीतिक लड़ाई में व्यस्त है। हालात ये हैं कि शहर के विकास कार्य अधूरे पड़े हैं और कोई काम समय पर पूरा नहीं हो रहा।

सफाई व्यवस्था पूरे शहर में चरमरा गई है। इसके बावजूद नगरपरिषद अपनी आंतरिक राजनीति में उलझी हुई है।
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