कुचामन सिटी में चैक के प्रकरण में लोक अदालत में हुए राजीनामा की शर्तों का पालन नहीं करने पर मुकेश को गिरफ्तार कर न्यायालय ने सिविल जेल भेज दिया।


अब वह तब तक जेल में रहेगा, जब तक गिरफ्तारी वारंट में अंकित राशि जमा नहीं करता।

दरअसल, वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कुचामन सिटी कामाक्षी मीणा की अदालत में एनआई एक्ट प्रकरण में दिनांक 28 सितम्बर 2024 को पक्षकारान के मध्य राजीनामा हुआ था।
इस समझौते के तहत मुकेश पुत्र हरिराम निवासी 11 अम्बेडकर कॉलोनी रसाल तहसील कुचामन सिटी ने परिवादी/डिक्रीदार मुकेश कुमार को ₹1,20,000 राशि चैक की दिनांक से 9% वार्षिक ब्याज सहित 10,000 रुपए मासिक किस्तों में चुकाने का वचन दिया था।

20 हजार रुपए ही चुकाए, 7 महीनों से नहीं दी किस्त
मुकेश ने केवल दो किस्तें अदा की, लेकिन दिसम्बर 2024 से जून 2025 तक कुल 7 माह की किस्तों (₹70,000) का भुगतान नहीं किया। इस पर डिक्रीदार मुकेश कुमार के अधिवक्ता मोहम्मद हनीफ ने 01 जुलाई 2025 को इजराय पेश कर बकाया राशि वसूली की कार्रवाई शुरू करवाई।
न्यायालय द्वारा वसूली वारंट जारी होने के बाद जब वसूली योग्य सामान नहीं मिला तो सहायक नाजिर की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने आदेश 21 नियम 38 सीपीसी के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
कोर्ट के आदेश पर हुई गिरफ्तारी
वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कामाक्षी मीणा की अदालत से जारी गिरफ्तारी वारंट की पालना में सहायक नाजिर गोविन्द राम लोमरोड़ ने लगातार प्रयासों के बाद 04 सितम्बर 2025 को गुप्त सूचना पर मुकेश को पुराने रोडवेज बस स्टेण्ड सेवदा कचौरी के पास केक वाली गली से गिरफ्तार किया।
अदालत में पेशी के बाद न्यायालय ने आदेश दिया कि राशि जमा नहीं कराने पर मुकेश को सिविल जेल परबतसर भेजा जाए। अब वह तब तक जेल में रहेगा, जब तक गिरफ्तारी वारंट में अंकित राशि जमा नहीं करता।
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