BJP/Congress. कांग्रेस के चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाने का खेल डीडवाना कुचामन जिले की कुचामन सिटी नगर परिषद में चला। ऐसा ही भरतपुर में प्रधान उपचुनाव के बाद अब एक बीजेपी विधायक के बयान ने अपनी ही सरकार को सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया।


पहले जान लेते हैं कि उस महिला विधायक ने क्या कहा कि
भरतपुर के कामां से विधायक नौक्षम चौधरी ने कहा कि भरतपुर लोकसभा में जितने भी बीजेपी के विधायक हैं, उन्होंने अपनी विधानसभा में कांग्रेस के प्रधान हटाए हैं और बीजेपी समर्थित प्रधानों को बैठाया है।

साथ ही अपने बयान में राज्य मंत्री को भी लपेट लिया। जवाहर सिंह बेढम का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि नगर पंचायत में अभी भी कांग्रेस समर्थित प्रधान क्यों काम कर रहे हैं? आप क्यों किसी बीजेपी समर्थित व्यक्ति को प्रधान नहीं बनाते? आप सरकार में मंत्री हैं, आप खुद को सरकार कहते हैं। तो आपको यह भी करना चाहिए ताकि हम कह सकें कि कांग्रेस के प्रधान को हटाकर बीजेपी के कार्यकर्ता को प्रधान बना दिया गया है।
बस यही बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
हाल ही में कुचामन सिटी नगर परिषद में सत्ता का खेल हुआ। जहां कांग्रेस के सभापति आसिफ खान और उपसभापति हेमराज चावला को हटा दिया गया। कुछ कारण भी रहे, हालांकि हेमराज चावला का कहना था कि राजनीतिक दुर्भावना के चलते उन्हें हटाया गया। साथ ही उन पर जो सरकारी जमीन पर उनके नाम पट्टा बनाने का आरोप लगाया गया, उन्होंने उसे झूठा बताया और कहा कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

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अभी वर्तमान में बीजेपी के सभापति सुरेश सिखवाल नगर परिषद को संभाल रहे हैं।
वैसे, रविवार 24 अगस्त को डीग जिले के कामां और पहाड़ी पंचायत समिति के कांग्रेस के प्रधानों का निष्कासन होने के बाद, दोनों पंचायत समिति के प्रधान पद के उपचुनाव हुए थे। जहां बीजेपी के प्रत्याशी चुनाव जीतकर प्रधान बने।
एक यही बात कॉमन नहीं है दोनों मामलों में कि कांग्रेस को हटाकर बीजेपी के प्रधान और सभापति बने।
यहां भी एक मंत्री के नाम का जिक्र आया। 26 अगस्त को कुचामन शहर में सभापति और उपसभापति के नाम के बोर्ड हटाने के लिए कर्मचारी पहुंचे।
इस पर निलंबित उपसभापति हेमराज चावला ने बताया कि आयुक्त से बात की, आयुक्त ने कहा कि यह मंत्री जी का आदेश था।
चावला ने मंत्री पर बयान देते हुए कहा कि मंत्री सभी के हैं, एक पार्टी के नहीं हैं। कार्यवाहक सभापति ने कार्यवाही की है, आगे मंत्री की मर्जी।
इन दोनों ही मामलों को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का बयान आया।
कुचामन में कांग्रेस के सभापति और उपसभापति के निलंबन पर उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है और राजनीतिक दुर्भावना है।
वहीं, भरतपुर वाले मामले पर उन्होंने कहा कि जो बात कांग्रेस पार्टी कह रही है, उसकी साक्ष्य खुद सत्ताधारी दल की विधायक दे रही हैं।
कामां से बीजेपी विधायक नौक्षम चौधरी ने स्वीकार किया है कि भरतपुर में कांग्रेस से जुड़े प्रधानों को मनगढ़ंत आरोप लगाकर पद से हटाया गया और नियमों को ताक पर रखकर बहुमत के खिलाफ उनकी जगह बीजेपी से जुड़े प्रधानों को बैठाया गया।
डोटासरा बोले-
इसका साफ मतलब है कि बीजेपी ने राजनीतिक दुर्भावना से कार्रवाई करते हुए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता के दुरुपयोग से हटाया। बीजेपी ने संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की खुलेआम हत्या की है।
डोटासरा ने कहा कि नौक्षम जी का धन्यवाद, जो उन्होंने हिम्मत करके सच्चाई सबके सामने रखी। लेकिन बीजेपी विधायक की यह स्वीकारोक्ति खतरनाक है।
इस मामले पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि नौक्षम चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा गया है, सार्वजनिक मंच पर कैसे बोलना है यह समझाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाना बीजेपी का आचरण नहीं, कांग्रेस की परंपरा है।
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