डीडवाना-कुचामन पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सिंडिकेट गैंग के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।


पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, पासबुक, नकदी तथा एक अवैध पिस्टल मय कारतूस बरामद किया है, जबकि गैंग का मुख्य सरगना फरार हो गया।

स्कॉर्पियो में बैठकर कर रहे थे साइबर ठगी
दरअसल, 24 अगस्त 2025 को पुलिस अधीक्षक डीडवाना-कुचामन ऋचा तोमर (IPS) के निर्देशानुसार साइबर शिकायतों पर कार्रवाई करने हेतु मौलासर पुलिस थाना क्षेत्र में दबिश दी गई। वृताधिकारी डीडवाना धरम पूनिया के नेतृत्व में गठित टीम को सूचना मिली कि शिवपाल सिंह और उसके साथी पीपला का बास तलाई स्थित सरकारी विद्यालय के पास एक सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठकर साइबर ठगी की गतिविधियों में संलिप्त हैं।
सूचना पर टीम मौके पर पहुंची तो पुलिस को देखते ही आरोपी भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर सात जनों को दबोच लिया गया। वहीं मुख्य सरगना दिनेश रणवां फरार होने में सफल हो गया।

सिंडिकेट में शामिल चार आरोपी कुचामन सिटी के
पकड़े गए आरोपियों में शिवपाल सिंह (22) व जितेन्द्र सिंह (22) पुत्र भवानी सिंह व महेन्द्र सिंह, दोनों निवासी पीपला का बास थाना मौलासर; विकास कुमार (23) पुत्र कैलाशचंद रैगर निवासी कुकनवाली, रामदेवाराम (30) पुत्र नारायणराम जाट, निवासी कुकनवाली, मुकेश (23) पुत्र चैनाराम तथा कमल (22) पुत्र हेमाराम जाट निवासी उदयपुरा और आदिल उर्फ मोनू (24) पुत्र बाबूदीन निवासी आथूना दरवाजा शामिल हैं।
बदमाशों के पास मिली पिस्टल और मैग्जीन
गिरफ्तार आरोपियों से 21 एटीएम कार्ड, 22 सिम कार्ड, 10 मोबाइल फोन, एक वाई-फाई डॉगल, 4 चेकबुक, 9 पासबुक, ₹34,000 नकद, स्कॉर्पियो गाड़ी (आरजे 01 यूए 9155) तथा एक पिस्टल मय मैग्जीन और 12 जिंदा कारतूस बरामद हुए। बरामद दस्तावेजों और खातों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की साइबर शिकायतों के जुड़े होने की जानकारी मिली है।
पूछताछ में सामने आया –
लोगों के बैंक खातों से मुख्य सरगना तक पहुंचते थे रुपए
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित गिरोह बनाकर भोले-भाले लोगों को कमीशन, लालच या झांसे में लेते थे। इसके बाद उनसे बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और खातों से लिंक सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर ठगी की राशि जमा करवाते। फिर यह रकम एटीएम, चेक या ई-मित्र के माध्यम से निकालकर मुख्य सरगना तक पहुंचाई जाती थी। बदले में आरोपियों को कमीशन मिलता था।
पुलिस ने मौलासर थाने में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू कर दिया है। गिरफ्तार आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है, जिससे और बड़े खुलासों की संभावना है।

यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस राजस्थान और राजेन्द्र सिंह (आई.पी.एस) महानिरीक्षक पुलिस अजमेर रेंज अजमेर के निर्देशन में, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र से प्राप्त सूचना के आधार पर ऋचा तोमर (आई.पी.एस) पुलिस अधीक्षक जिला डीडवाना-कुचामन के निकट पर्यवेक्षण में नेमीचंद खारिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुचामन तथा धरम पूनिया, वृताधिकारी डीडवाना के नज़दीकी सुपरविजन में जितेन्द्र सिंह, उपनिरीक्षक थाना मौलासर मय टीम एवं साइबर सैल डीडवाना के साथ मिलकर की गई।
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