कुचामन सिटी में निर्दलीय चुनाव लड़ने उतरे महेश रामचंद्रका ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि उन्हें धमकियां दी जा रही थीं और नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
उनका आरोप है कि उन पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। साथ ही, उनके घर पर पुलिस भेजी गई।

दरअसल, गुरुवार 3 सितंबर को नगर परिषद चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि थी। शाम के समय कुचामन के बिजनेसमैन महेश रामचंद्रका ने एक प्रेस नोट जारी किया, जिसके सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई।
नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप
महेश रामचंद्रका ने बताया कि उन पर नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें जबरन परेशान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि दो दिन पहले भारी दबाव और काम बंद करवाने जैसी धमकियां मिलने के बाद उन्हें मजबूरन घर छोड़कर जाना पड़ा।
बार-बार भेजी गई पुलिस
उनका कहना है कि इसके बाद भी कुछ लोग नहीं माने और उनके घर पर पुलिस भेजी गई। उनका आरोप है कि कई बार पुलिस उनके घर पहुंची। उस दौरान उनकी पत्नी और बेटा-बेटी घर पर थे। पुलिस ने घर की तलाशी ली, परिजनों को भी धमकाया गया और उनके बारे में पूछताछ की गई।
महेश रामचंद्रका के अनुसार – पिछले दो दिनों में करीब 6 बार पुलिस अलग-अलग समय पर, कभी रात में तो कभी दिन में, उनके घर पहुंची।
प्रेस नोट में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने अपनी राजनीतिक पहुंच होने का दावा करते हुए उन्हें धमकाया और कहा कि ऊपर से फोन आ रहे हैं तथा उनसे बात करना जरूरी है, अन्यथा उनका बड़ा नुकसान हो जाएगा।
वहीं, विपक्षी प्रत्याशी द्वारा उपखंड अधिकारी को एक झूठा शिकायती पत्र दिया गया और पुराने झूठे मुकदमों की जानकारी देकर नामांकन फॉर्म निरस्त करवाने की मांग की गई। इसके अलावा रोहित गोदारा गैंग से धमकियां मिलने के बाद एक PSO उनके साथ था और ड्यूटी करने के बावजूद उसे निलंबित कर दिया गया। अब एक नया PSO लगाया गया है।
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