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कुचामन में प्रत्याशियों की शिफ्टिंग से सियासी हलचल, पार्टियों को क्रॉस वोटिंग का डर

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कुचामन सिटी. नगर परिषद चुनाव में मतदान के बाद अब राजनीतिक पार्टियों की नजरें 14 सितंबर को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिक गई हैं।

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लेकिन परिणाम से पहले ही कुचामन की सियासत में एक नया खेल शुरू हो गया है। राजनीतिक पार्टियां अपने संभावित विजेता प्रत्याशियों को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं और पार्टी के भीतर संभावित दगा या क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की कवायद शुरू हो गई है।

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बीजेपी ने रात में ही शुरू की प्रत्याशियों की शिफ्टिंग

सूत्रों के अनुसार – बीजेपी ने बुधवार रात से ही अपने संभावित विजेता प्रत्याशियों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। मंत्री विजय सिंह के घर हुई बैठक के बाद एक-एक कर प्रत्याशी अपना सामान लेकर पहुंचे। इसके बाद कई प्रत्याशी गाड़ियों में बैठकर रवाना होते नजर आए। वहीं कांग्रेस भी अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी की तैयारी में जुटी है।

पार्टी की यह कवायद इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि किसी पार्टी के पास बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद सभापति के चुनाव तक समीकरण बदल सकते हैं।

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पिछली बार का अनुभव, इस बार ज्यादा सतर्क पार्टियां

पिछले निकाय चुनाव में भी बीजेपी के पास बहुमत का आंकड़ा होने के बावजूद पार्टी सत्ता में नहीं रह सकी थी। ऐसे में इस बार राजनीतिक पार्टियां किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहतीं।

अब पार्टियां अपने-अपने संभावित जीते हुए पार्षदों पर नजर रखने के साथ-साथ उनके बीच एकजुटता बनाए रखने की कोशिश में जुट गई हैं। खासतौर पर उन प्रत्याशियों को लेकर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है, जिनकी जीत को पार्टी पहले से लगभग तय मानकर चल रही है।

निर्दलीयों के साथ बाड़ेबंदी से दूर रहने वाले प्रत्याशी भी अहम

सियासी नजर सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों पर ही नहीं है। चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी भी सत्ता के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिन निर्दलीय प्रत्याशियों के जीतने की स्थिति मजबूत है, उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश भी राजनीतिक पार्टियों की रणनीति का हिस्सा होगी।

इसके साथ ही उन प्रत्याशियों पर भी नजर रहेगी, जो पार्टी की बाड़ेबंदी से दूर रहना चाहते हैं। परिणाम के बाद ऐसे पार्षदों का रुख और उनकी राजनीतिक भूमिका भी बोर्ड बनाने के समीकरण में महत्वपूर्ण होगी।

यानी 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद असली सियासी जोड़-तोड़ का दौर शुरू होगा। किस पार्टी के पास कितने पार्षद आते हैं, कौन निर्दलीय किस तरफ जाता है और कौन प्रत्याशी पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा रहता है – इसी से बोर्ड की तस्वीर काफी हद तक साफ होगी।

21 सितंबर को होगा सभापति का चुनाव

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 14 सितंबर को पार्षदों के चुनाव की मतगणना और परिणाम घोषित होंगे। इसके बाद 21 सितंबर को नगर परिषद के सभापति का चुनाव होगा। सभापति पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होगा और मतदान समाप्त होते ही मतगणना की जाएगी।

इसके बाद 22 सितंबर को उपसभापति का चुनाव होगा। 14 सितंबर से 21 सितंबर के बीच कुचामन में सियासी समीकरण तेजी से बनते-बिगड़ते नजर आएंगे। 

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