डीडवाना-कुचामन जिले के 8 नगर निकायों के चुनाव परिणामों के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर सियासी गणित शुरू हो गया है।
कहीं भाजपा या कांग्रेस स्पष्ट बहुमत में है, तो कहीं बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों का समर्थन जरूरी होगा। वहीं मकराना में निर्दलीयों की संख्या इतनी अधिक है कि वे चाहें तो अपने दम पर बोर्ड बना सकते हैं।

कुचामन सिटी: कांग्रेस को 6, भाजपा को 8 निर्दलीयों की जरूरत
कुचामन नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस ने 17, भाजपा ने 15 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 13 सीटें जीती हैं। यहां बोर्ड बनाने के लिए 23 पार्षदों का बहुमत जरूरी है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 17 |
| भाजपा | 15 |
| निर्दलीय | 13 |
| बहुमत | 23 |
कांग्रेस के पास 17 सीटें हैं। बहुमत के लिए उसे 6 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।

भाजपा के पास 15 सीटें हैं। उसे बहुमत के लिए 8 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।
कुचामन में दोनों दलों को निर्दलीयों की जरूरत है, लेकिन कांग्रेस की स्थिति भाजपा से मजबूत है। यहां निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका में हैं।
डीडवाना: कांग्रेस को 5, भाजपा को 12 निर्दलीयों की जरूरत
डीडवाना के 40 वार्डों में कांग्रेस ने 16, भाजपा ने 9, निर्दलीयों ने 14 और RLP ने 1 सीट जीती है। बहुमत का आंकड़ा 21 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 16 |
| भाजपा | 9 |
| निर्दलीय | 14 |
| बहुमत | 21 |
कांग्रेस 16 सीटों के साथ बहुमत से 5 दूर है।
भाजपा 9 सीटों पर है और उसे 12 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।
डीडवाना में कांग्रेस के लिए बोर्ड बनाना भाजपा के मुकाबले काफी आसान है। कांग्रेस को सिर्फ 5 निर्दलीयों, जबकि भाजपा को 12 निर्दलीयों की जरूरत है।
मकराना: निर्दलीयों के पास अपने दम पर बोर्ड बनाने का बहुमत
मकराना में कुल 60 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 18, भाजपा ने 6 और निर्दलीयों ने 36 सीटें जीती हैं। बहुमत का आंकड़ा 31 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 18 |
| भाजपा | 6 |
| निर्दलीय | 36 |
| बहुमत | 31 |
कांग्रेस को बहुमत के लिए 13 निर्दलीयों की जरूरत होगी।
भाजपा को 25 निर्दलीयों की जरूरत होगी।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात निर्दलीयों की संख्या है।
36 निर्दलीय − 31 बहुमत = 5
यानी निर्दलीयों के पास बहुमत से 5 सीट ज्यादा हैं।मकराना में निर्दलीय चाहें तो कांग्रेस या भाजपा के समर्थन के बिना अपने दम पर बोर्ड बना सकते हैं।
मकराना में सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत निर्दलीय हैं। कांग्रेस को 13 और भाजपा को 25 निर्दलीयों की जरूरत होगी, जबकि निर्दलीयों को किसी बड़े दल की जरूरत नहीं है।
लाडनूं: कांग्रेस को 6, भाजपा को 8 निर्दलीयों की जरूरत
लाडनूं के 45 वार्डों में कांग्रेस 17, भाजपा 15, वास्तविक निर्दलीय 12 और RLP 1 सीट पर है। बहुमत का आंकड़ा 23 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 17 |
| भाजपा | 15 |
| निर्दलीय | 12 |
| बहुमत | 23 |
कांग्रेस को बहुमत के लिए 6 निर्दलीयों की जरूरत होगी।
भाजपा को 8 निर्दलीयों की जरूरत होगी।
लाडनूं में दोनों दलों को निर्दलीयों की जरूरत है, लेकिन कांग्रेस को भाजपा से 2 कम निर्दलीयों की जरूरत है। इसलिए कांग्रेस की स्थिति बेहतर है।
बोरावड़: भाजपा को सिर्फ 2 निर्दलीय चाहिए, कांग्रेस का गणित कमजोर
बोरावड़ के 25 वार्डों में भाजपा ने 11, कांग्रेस ने 4, निर्दलीयों ने 8 और RLP ने 2 सीटें जीती हैं। बहुमत का आंकड़ा 13 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| भाजपा | 11 |
| कांग्रेस | 4 |
| निर्दलीय | 8 |
| बहुमत | 13 |
भाजपा 11 सीटों के साथ बहुमत से केवल 2 दूर है।
यानी भाजपा को सिर्फ 2 निर्दलीयों का समर्थन चाहिए।
दूसरी तरफ कांग्रेस के पास 4 सीटें हैं। उसे बहुमत के लिए 9 अतिरिक्त सदस्य चाहिए, लेकिन वास्तविक निर्दलीय केवल 8 हैं।
बोरावड़ में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत है। कांग्रेस केवल निर्दलीयों के सहारे बोर्ड नहीं बना सकती।
नावां: कांग्रेस को सिर्फ 3 निर्दलीयों की जरूरत
नावां के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 10, भाजपा ने 7 और निर्दलीयों ने 8 सीटें जीती हैं। बहुमत का आंकड़ा 13 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 10 |
| भाजपा | 7 |
| निर्दलीय | 8 |
| बहुमत | 13 |
कांग्रेस को सिर्फ 3 निर्दलीयों की जरूरत है।
भाजपा को 6 निर्दलीयों की जरूरत होगी।
नावां में कांग्रेस की स्थिति भाजपा से मजबूत है। कांग्रेस को केवल 3 निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।
परबतसर: भाजपा का सीधा बोर्ड
परबतसर के 25 वार्डों में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती हैं। निर्दलीय कोई नहीं जीता। बहुमत का आंकड़ा 13 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| भाजपा | 13 |
| कांग्रेस | 12 |
| निर्दलीय | 0 |
| बहुमत | 13 |
भाजपा के पास पहले से ही 13 सीटें हैं।
भाजपा बिना किसी समर्थन के सीधे अपना बोर्ड बना सकती है।
कांग्रेस के पास 12 सीटें हैं। वह बहुमत से केवल 1 सीट पीछे है, लेकिन निर्दलीय कोई नहीं हैं।
खाटू खुर्द: कांग्रेस के पास सीधा बहुमत
खाटू खुर्द के 20 वार्डों में कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 5, वास्तविक निर्दलीयों ने 3 और RLP ने 1 सीट जीती है। बहुमत का आंकड़ा 11 है।
| दल | सीटें |
|---|---|
| कांग्रेस | 11 |
| भाजपा | 5 |
| निर्दलीय | 3 |
| बहुमत | 11 |
कांग्रेस के पास पहले से ही 11 सीटें हैं।
कांग्रेस बिना किसी निर्दलीय के समर्थन के सीधे बोर्ड बना सकती है।
भाजपा के पास 5 सीटें हैं। उसे 6 अतिरिक्त सदस्य चाहिए, लेकिन निर्दलीय केवल 3 हैं।
यानी सभी निर्दलीयों को साथ लेने के बाद भी भाजपा बहुमत से 3 सीट पीछे रहेगी।
इस तरह आठ निकायों की कुल तस्वीर में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है। कई निकायों में निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन की चाबी अपने हाथ में रखते हैं, जबकि मकराना में निर्दलीयों के पास इतनी संख्या है कि वे चाहें तो अपने दम पर बोर्ड गठित कर सकते हैं।







