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कुचामन सभापति चुनाव: जीत के करीब भाजपा, लेकिन ये 3 फैक्टर बिगाड़ सकते हैं पूरा खेल; कांग्रेस के पास पलटवार का मौका

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कुचामन सिटी के चौक-चबूतरों पर इन दिनों एक ही बात की चर्चा बड़े जोर-शोर से हो रही है कि किसके हाथ नगर परिषद की चाबी लगेगी।

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कोई भाजपा प्रत्याशी महेश रामचंद्रका पर दांव लगा रहा है तो कहीं हाइब्रिड भाइयों की चर्चा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि छोटे भाई आसिफ खान को सभापति की कुर्सी तक पहुंचाने वाले आरिफ खान क्या इस बार खुद हाइब्रिड सभापति बन पाएंगे? या निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर उतरे महेश रामचंद्रका जीत का सेहरा पहन लेते हैं।

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अभी तक दोनों पार्टियों की स्थिति पर एक नजर डाल लेते हैं। किसके पास कितने निर्दलीयों का समर्थन है, क्योंकि इस बार सभापति का चुनाव उनके नाम है।

निर्दलीयों की संख्या 13 है। अब सवाल है कि किसके पास कितने निर्दलीयों का समर्थन है?

भाजपा के पास कितने निर्दलीयों का समर्थन?

भाजपा की बात करें तो मतदान के बाद केवल एक बार उनके पार्षद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे, वह था शपथ ग्रहण के समय। इस दौरान कई दिनों की बाड़ेबंदी से बाहर आए पार्षदों में 15 भाजपा के थे और 4 निर्दलीय पार्षद थे। इन सभी ने एक साथ शपथ ली। यानी 19 पार्षदों का समर्थन भाजपा को कुछ दिन पहले ही मिल चुका था।

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अब स्थिति यह है कि सूत्रों के अनुसार भाजपा के पास 7 से 8 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन है। यानी कहा जा सकता है कि भाजपा के पास जीत का आंकड़ा पूरा करने जितने पार्षद मौजूद हैं।

कांग्रेस के पास 17 पार्षद, 6 निर्दलीयों की जरूरत

कांग्रेस की स्थिति की बात करें तो उसके पास 17 पार्षद हैं। बहुमत के लिए कांग्रेस को 6 निर्दलीय पार्षदों की जरूरत है। हालांकि खबर यह आ रही है कि कांग्रेस अभी 2 से 3 निर्दलीय पार्षद ही जुटा पाई है। ऐसे में बहुमत प्राप्त करने की कोशिश में कांग्रेस फिलहाल पीछे नजर आ रही है।

यानी मौजूदा राजनीतिक गणित को देखें तो भाजपा प्रत्याशी महेश रामचंद्रका के सभापति बनने की संभावना नजर आ रही है। हालांकि इस पूरे समीकरण में अभी कुछ रुकावटें भी हैं।

बाड़ेबंदी से बाहर निर्दलीय, बिगाड़ सकते हैं पूरा खेल

अभी भी कुछ निर्दलीय पार्षद ऐसे हैं, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों की बाड़ेबंदी से बाहर हैं। इनकी संख्या इतनी है कि वे कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये निर्दलीय पार्षद किस पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करेंगे।

यही निर्दलीय पार्षद इस पूरे चुनाव के समीकरण को अंतिम समय में बदल सकते हैं। ऐसे में दोनों ही दलों की नजर बाड़ेबंदी से बाहर चल रहे इन पार्षदों पर टिकी हुई है।

पार्टी में भीतरघात या क्रॉस वोटिंग का डर

एक बार फिर भाजपा उसी मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां वह पिछले चुनाव में खड़ी थी। जीत से कुछ कदम दूर, निर्दलीयों का समर्थन और बहुमत का आंकड़ा भी उसके पक्ष में नजर आ रहा है। हालांकि पार्टी के सामने सबसे बड़ा डर यही है कि पिछली बार की तरह इस बार भी उसके ही प्रत्याशी क्रॉस वोटिंग न कर दें और जीता हुआ खेल हार में न बदल जाए।

पिछली बार आरिफ खान ने अपने भाई आसिफ खान को हाइब्रिड प्रणाली के जरिए सभापति की कुर्सी तक पहुंचाया था। इस बार आरिफ खान खुद सभापति बनने की दौड़ में हैं। ऐसे में हाइब्रिड समीकरण भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।

पिछली बार भाजपा के हाथों से सत्ता उसके ही खेमे में हुए भीतरघात के चलते निकल गई थी। ऐसे में इस बार भाजपा के सामने न केवल निर्दलीयों को अपने साथ बनाए रखने की चुनौती है, बल्कि अपने पार्षदों को भी एकजुट रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।

कहा जा सकता है कि अगर इस बार भीतरघात या क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति नहीं बनती है तो मौजूदा समीकरण के आधार पर भाजपा के महेश रामचंद्रका सभापति बन सकते हैं। हालांकि राजनीति के इस खेल में आखिरी फैसला मतदान के बाद ही सामने आएगा।

मंत्री विजय सिंह चौधरी की साख भी दांव पर

इस चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी की राजनीतिक साख भी दांव पर लगी हुई है। प्रदेश नेतृत्व की ओर से उनके विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को सत्ता में लाने की जिम्मेदारी उनके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नावां में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाने के बाद अब कुचामन नगर परिषद का चुनाव उनके लिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

कुचामन में मंत्री विजय सिंह चौधरी ने निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए हैं और मौजूदा समीकरण में भाजपा को निर्दलीयों का समर्थन मिलने की चर्चा भी है। ऐसे में यदि भाजपा सभापति पद हासिल करती है तो यह केवल पार्टी की जीत नहीं होगी, बल्कि मंत्री विजय सिंह चौधरी के अपने विधानसभा क्षेत्र में संगठनात्मक पकड़ और राजनीतिक प्रबंधन की भी परीक्षा का परिणाम माना जाएगा।

वहीं, यदि आखिरी समय में समीकरण बदलता है तो उसका राजनीतिक असर भी चर्चा का विषय बनेगा। इसलिए सभापति चुनाव का यह मुकाबला भाजपा प्रत्याशी की जीत-हार के साथ-साथ मंत्री विजय सिंह चौधरी की स्थानीय राजनीतिक पकड़ के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कल चार घंटे में तय होगा कौन बनेगा सभापति

कल 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान किया जाएगा। पार्षद मतदान करेंगे और अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देंगे। इसके बाद मतगणना होगी और सामने आएगा कि किस पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पूरा किया और अगले पांच साल तक कुचामन नगर परिषद की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

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