कुचामन सिटी. दिगंबर जैन समाज के आत्मशुद्धि, संयम और सद्गुणों की साधना के पावन पर्व दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन रविवार को उत्तम सत्य धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ आराधना की गई।
डीडवाना रोड स्थित 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः 6:30 बजे 81 श्रावकों ने भगवान का कलशाभिषेक किया।

इसके बाद भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी दिलीप कुमार, प्रदीप कुमार गगवाल परिवार, पवन कुमार, प्रवीण कुमार पाटोदी परिवार, पीयूष कुमार, वीर कुमार पहाड़िया परिवार, सुरेश कुमार एवं अमित पाटोदी को प्राप्त हुआ।
धार्मिक अनुष्ठानों में लालचंद, महेंद्र, ललित, नीरज, विनय पहाड़िया, भंवरलाल झाझरी, अनिल पांड्या, सोहनलाल, नवीन, अशोक काला, राजेश, मनोज, मनीष, प्रदीप गगवाल, चिरजीलाल, विमल कुमार, अमित पाटोदी, तेजकुमार बडजात्या, भागचंद अजमेरा एवं रितेश लुहाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।

श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र पूजन, सोलहकारण पूजन, पंचमेरु पूजन, दशलक्षण पूजन एवं दशलक्षण विधान में उत्तम सत्य धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार का संकल्प लिया।
सत्य धर्म देता है मन-वचन-कर्म में एकरूपता का संदेश
जैन धर्म में उत्तम सत्य धर्म का अर्थ केवल सत्य बोलना नहीं, बल्कि हितकारी, संयमित और धर्मसम्मत वाणी का प्रयोग करना भी है। मन में एक बात और वाणी में दूसरी बात रखना सत्य धर्म के अनुरूप नहीं माना गया है। सत्य धर्म असत्य से बचने, कटु एवं अपमानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं करने तथा किसी के मन को ठेस पहुंचाने वाली वाणी से दूर रहने की प्रेरणा देता है।
लोभ, भय, क्रोध अथवा स्वार्थ के कारण असत्य का सहारा न लेकर मन, वचन और कर्म में एकरूपता रखना ही उत्तम सत्य धर्म की वास्तविक साधना है। सत्य धर्म व्यक्ति के जीवन में विश्वास, सरलता, पवित्रता और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
सायंकाल मंदिर परिसर में आरती एवं सामायिक के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान एक मिनट प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।







