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नावां उपजिला अस्पताल भवन निर्माण पर हाईकोर्ट की रोक, भूमि पर यथास्थिति के आदेश

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नावां शहर. वर्षों से प्रस्तावित राजकीय उपजिला चिकित्सालय के नए भवन के निर्माण को एक बार फिर कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ा है।

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राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर ने विवादित भूमि पर फिलहाल किसी भी प्रकार का निर्माण या परिवर्तन नहीं करने के निर्देश देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया है। इसके साथ ही राजस्थान राजस्व मंडल, अजमेर को लंबित स्थगन (स्टे) आवेदन पर यथासंभव एक माह के भीतर निर्णय करने के निर्देश दिए गए हैं।

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हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद नए अस्पताल भवन का निर्माण कार्य फिलहाल शुरू नहीं हो सकेगा। मामला न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित की एकलपीठ के समक्ष एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 16867/2026 में सुनवाई के दौरान आया। याचिका आमजन की ओर से गिरधारी, गौरव चौधरी, सतीश कुमार, भैरूलाल तथा अयूब अली ने दायर की थी। मामले में राज्य सरकार, तहसीलदार नावां, प्रभारी अधिकारी उपजिला चिकित्सालय, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त अजमेर तथा राजस्थान राजस्व मंडल, अजमेर को पक्षकार बनाया गया है।

स्टे आवेदन लंबित होने पर हाईकोर्ट पहुंचा मामला

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी कि भूमि विवाद से संबंधित स्टे आवेदन लंबे समय से राजस्थान राजस्व मंडल में लंबित है। यदि इस दौरान अस्पताल का निर्माण शुरू हो जाता और बाद में फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आता, तो स्थिति को पूर्ववत करना कठिन हो जाता। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि आदेश की प्रमाणित प्रति राजस्व मंडल में प्रस्तुत की जाए तथा मंडल एक माह के भीतर स्टे आवेदन पर निर्णय करे। तब तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।

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भूमि आवंटन को लेकर क्या है विवाद

राज्य सरकार ने 5 जनवरी 2026 को राजस्व ग्राम नावां, पटवार हल्का नावां स्थित खसरा संख्या 2753/2378 की तीन हेक्टेयर भूमि राजकीय उपजिला चिकित्सालय के नए भवन निर्माण के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को आवंटित की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह भूमि पहले से आईटीआई के नाम दर्ज है। इसी आधार पर भूमि आवंटन को पहले अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, अजमेर के समक्ष चुनौती दी गई थी। वहां राहत नहीं मिलने पर मामला राजस्थान राजस्व मंडल पहुंचा, जहां रिवीजन संख्या 1041/2026 दायर की गई। राजस्व मंडल ने रिवीजन स्वीकार करते हुए इसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न माना, लेकिन तत्काल स्थगन आदेश देने से इनकार करते हुए संबंधित रिकॉर्ड तलब कर लिया था।

रिवीजन में उठाए गए प्रमुख सवाल

वर्ष 2022 और 2025 में उपजिला चिकित्सालय के लिए पहले ही दो अलग-अलग स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी थी।

– पूर्व आवंटनों को निरस्त किए बिना तीसरी भूमि आवंटित करने पर आपत्ति जताई गई।

– प्रस्तावित भूमि डंपिंग यार्ड के समीप होने का मुद्दा उठाया गया।

– आईटीआई के नाम दर्ज भूमि होने के बावजूद एनओसी (अनापत्ति प्रमाण-पत्र) नहीं लेने का आरोप लगाया गया।

– अस्पताल तक पहुंच के लिए कटानी मार्ग नहीं होने की आपत्ति दर्ज कराई गई।

– रेलवे लाइन के निकट होने से ध्वनि प्रदूषण की आशंका जताई गई।

– मास्टर प्लान में संबंधित भूमि को लवणीय क्षेत्र दर्शाए जाने का भी उल्लेख किया गया।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2026 को राजस्थान सरकार के राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी ने प्रस्तावित राजकीय उपजिला चिकित्सालय भवन का शिलान्यास किया था। करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस अस्पताल का निर्माण कार्य अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल ठप हो गया है।

नावां: 40 करोड़ की लागत से बनेगा उपजिला चिकित्सालय, राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी ने किया शिलान्यास

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