कुचामन सिटी. प्रदेश में 309 शहरी निकाय प्रमुखों के पदों की आरक्षण लॉटरी राजस्थान स्वायत्त शासन विभाग द्वारा निकाली गई है।

इस पर हेमराज चावला का कहना है कि लॉटरी का ड्रॉ केवल वर्ग निर्धारण का मात्र औपचारिक गणित ही प्रतीत हो रहा है। इसमें रोटेशन पॉलिसी का दिखावटी प्रयोग हास्यास्पद व संदेहास्पद होने से सम्पूर्ण लॉटरी प्रक्रिया में कुचामन नगर परिषद के निकाय प्रमुख चयन में क्षेत्रीय अजा वर्ग के हितों व भावनाओं के साथ प्रत्यक्ष रूप से कुठाराघात ही हुआ है।

कुचामन नगर परिषद के निवर्तमान उपसभापति हेमराज चावला ने बताया कि कुचामन में अजा वर्ग के मतदाता बहुतायत में होने के उपरान्त वर्ष 1954 से लेकर वर्तमान तक यहाँ अनुसूचित जाति वर्ग के अध्यक्ष पद की लॉटरी प्रक्रिया में ही शामिल करना इसकी सम्पूर्ण त्रुटिपूर्ण संरचना को दर्शाता है। उल्लेखनीय है कि कुचामन नगर परिषद अध्यक्ष पद अजा वर्ग का नहीं आने के कारण किसी प्रकार की आपत्ति नहीं, बल्कि यहाँ दूषित व्यवस्थागत प्रक्रिया की है कि प्रदेश में शहरी निकायों के चुनाव वर्ष 2026 में होने जा रहे हैं तथा इसमें आरक्षण के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार माना गया है, जो सम्पूर्ण प्रक्रिया के दूषित व दलगत चरित्र को इंगित करता है।
उन्होंने कहा कि लॉटरी प्रक्रिया में सम्बन्धित नगर निकाय क्षेत्र की वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुरूप अजा के जनसंख्या ब्लॉकों को शामिल कर अजा मतदाताओं की गणना की गई है। जबकि चुनाव 2026 में होने जा रहे हैं। ऐसे में 15 वर्ष पूर्व की जनगणना में अजा वर्ग के मतदाताओं के जनसंख्या ब्लॉकों को शामिल कर लॉटरी निकालना सैद्धान्तिक रूप से कतई अनुचित है।

हेमराज चावला ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व कुचामन में अजा वर्ग के मतदाता लगभग 10,000 हैं, जो वर्ष 2026 में इससे अधिक हो चुके हैं। यहाँ संभावना है कि कुचामन नगर निकाय में अजा वर्ग की लॉटरी निकालने के निर्धारित मतदाताओं में आंशिक कमी के चलते ही इसे लॉटरी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। और यदि 2026 तक के अजा के बढ़े हुए मतदाताओं को शामिल करने पर संभवतः कुचामन नगर निकाय अजा वर्ग के अध्यक्ष पद की लॉटरी प्रक्रिया में शामिल होने के पात्र होते ही। यहाँ अन्यों की तरह अजा वर्ग के अध्यक्ष पद की लॉटरी का ड्रॉ निकल सकता था, जो उक्त दूषित प्रक्रिया के चलते नहीं हो सका।
2019-20 में आरक्षित सामान्य सीट दोबारा रिपीट होने पर जताया संदेह
हेमराज चावला ने बताया कि उक्त सम्पूर्ण लॉटरी प्रक्रिया का दूसरा दूषित पहलू यह है कि लॉटरी प्रक्रिया में आरोही-अवरोही क्रमानुसार लॉटरी निकालनी होती है, अर्थात जहाँ जिस वर्ग के पद की पूर्व में लॉटरी निकल चुकी होती है, आगामी लॉटरी प्रक्रिया में उसको छोड़ते हुए शेष वर्ग की जनसंख्या के घटते क्रम में सूची बनाई जाकर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर वर्ष 2014 और 2019-20 में आरक्षित रही सीटों को अपवर्जित करते हुए आरक्षित पदों का निर्धारण वैधानिक होता।
चावला ने कहा कि लेकिन कुचामन में वर्ष 2019-20 में आरक्षित सामान्य (ओपन) अध्यक्षीय पद का पुनः रिपीट होना हास्यास्पद व संदेहास्पद प्रतीत होता है। इस प्रकार अजा वर्ग की अपेक्षा यहाँ अन्य जाति वर्ग का कोई पद आरक्षित हो जाता तो लॉटरी प्रक्रिया पर लेश मात्र भी संदेह नहीं होता।






