Saturday, July 11, 2026
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नावां में संस्कार स्कूल जयपुर के विद्यार्थियों ने जानी नमक के उत्पादन से पैकेजिंग तक की प्रक्रिया

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नावां उपखंड मुख्यालय के ग्राम राजास में स्थित पंकज आयोडाइज्ड साल्ट इंडस्ट्रीज में शनिवार को संस्कार स्कूल, जयपुर के विद्यार्थी नमक रिफाइंड करने की प्रक्रिया की जानकारी लेने पहुंचे।

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विद्यालय के कॉमर्स वर्ग के 11वीं व 12वीं के बच्चों ने नमक रिफाइंड करने की जानकारी ली तथा रिफाइनरी का अवलोकन किया।

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पंकज आयोडाइज्ड साल्ट इंडस्ट्रीज के निदेशक प्रहलाद राय अग्रवाल, प्रबंधक दीपक अग्रवाल व पंकज अग्रवाल ने बच्चों व विद्यालय प्रबंधन का अभिवादन किया।

इसके साथ ही विद्यालय की प्रधानाचार्य नीलम भारद्वाज, गिरधर कुमारी, अध्यापक अशोक शर्मा, कमलजीत वर्मा, कोमल पांड्या ने भी बच्चों के साथ अवलोकन किया। इसके पश्चात निदेशक प्रहलाद राय अग्रवाल ने बच्चों को जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविख्यात सांभर झील के छोर पर स्थित नावांशहर ने देशभर में नमक के लिए अपनी अलग पहचान कायम की है।

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नावां ने कुछ वर्षों में नमक नगरी के नाम से अपनी पहचान बनाई है। यहां नमक रिफाइनरियों के बढ़ते प्रचलन के बाद से ही साधारण नमक की औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई हैं। इन रिफाइनरियों में नमक की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए इसे रिफाइंड कर नमक में मिले हुए अपशिष्ट को बाहर कर दिया जाता है। तैयार रिफाइंड नमक में स्वचालित मशीनों से पर्याप्त आयोडीन मिलाने के बाद आईएसआई मार्का की स्टैंडर्ड पैकिंग की जाती है। पैकिंग के बाद यह नमक ट्रकों व मालगाड़ियों के माध्यम से देश के हर कोने में पहुंच रहा है। राजस्थान में सर्वाधिक नमक का उत्पादन नावां में किया जाता है।

प्राकृतिक तरीके से होता है नमक का उत्पादन

प्रहलाद राय अग्रवाल व लैब केमिस्ट रतनलाल कुमावत ने बच्चों को बताया कि नमक का उत्पादन केवल प्राकृतिक रूप से ही किया जाता है। नमक उद्यमी जमीन पर बड़े क्यार व कंटासर बनाते हैं। बोरवेल से पानी का दोहन कर उसे कंटासर में डाला जाता है।

इसके बाद पानी को एक कंटासर से दूसरे और दूसरे से तीसरे में इस तरह कई कंटासरों में घुमाया जाता है। इससे पानी का खारापन बढ़ जाता है और पानी को लगभग 25 डिग्री तक खारा किया जाता है। इसके पश्चात पानी को क्यारियों में डाला जाता है। तेज धूप के कारण पानी धीरे-धीरे नमक के रूप में बदलता रहता है।

इसके पश्चात मजदूरों द्वारा नियमित सुबह व शाम पानी को हिलाया जाता है, जिसे मारवाड़ी भाषा में गोजणी करना कहते हैं। इससे नमक जमने में काफी सहूलियत मिलती है। धीरे-धीरे सूरज की धूप से पानी नमक में बदल जाता है। नमक बनने के बाद मजदूर क्यारियों में ही इसे इकट्ठा कर ढेरियां लगाते हैं। ढेरियां लगाने के दूसरे दिन उस नमक को क्यारियों से बाहर निकाला जाता है, जिसे ट्रैक्टरों के माध्यम से नमक प्लांट व रिफाइनरी तक पहुंचाया जाता है।

रिफाइनरी में ऐसे होता है नमक का शुद्धिकरण

प्रबंधक पंकज अग्रवाल ने बच्चों को जानकारी देते हुए बताया कि झील के खारे पानी को क्यारियों में डालकर उत्पादित किए गए नमक को शुद्धिकरण के लिए ट्रैक्टरों के माध्यम से रिफाइनरियों में पहुंचाया जाता है। जहां नमक को सीधे हॉपर में डालकर पट्टे के माध्यम से धीरे-धीरे वाटर टैंक में पहुंचाया जाता है, जिसमें करीब 25 डिग्री तक खारा पानी होता है। इस खारे पानी में नमक को मिला दिया जाता है। टैंक में पानी रोटेट व बबल होता रहता है, जिससे नमक वॉश होता है। तीन टैंकों में वॉश होने के बाद स्लरी को सेंट्रीफ्यूज मशीन में डाला जाता है, जिसमें पानी व नमक दोनों अलग-अलग हो जाते हैं।

इसके पश्चात रोलर में डालकर नमक की पिसाई की जाती है तथा तेज तापमान पर सुखा दिया जाता है। सूखने के बाद वाइब्रो चालनों की सहायता से नमक की ग्रेडिंग की जाती है। इस शुद्ध नमक में पर्याप्त आयोडीन मिलाकर ऑटोमेटिक मशीनों की मदद से इसकी एक किलो व आधा किलो की आकर्षक पैकिंग की जाती है। यहां से ट्रकों व मालगाड़ियों से दूसरे राज्यों व शहरों में सप्लाई की जाती है, जहां लोग इसका खाने में उपयोग करते हैं।

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औद्योगिक उपयोग में भी लिया जाता है नमक

प्रबंधक दीपक अग्रवाल ने बच्चों को बताया कि रिफाइनरियों में तैयार बिना आयोडीन वाला नमक डाई केमिकल इंडस्ट्री, वॉशिंग इंडस्ट्री, सोडा ऐश, टूथपेस्ट, चमड़ा उद्योग व नमकीन उद्योग सहित अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ व राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर भेजा जाता है।

बच्चों ने नमक रिफाइनरी का अवलोकन कर अपनी खुशी व्यक्त की तथा विद्यालय प्रबंधन ने पंकज आयोडाइज्ड साल्ट इंडस्ट्रीज के संचालकों का आभार व्यक्त किया।

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