कुचामन सिटी. क्षेत्र के कई गांवों में हुई मानसूनी बारिश से अगेती बोई गई खरीफ फसलों में नई जान आ गई है। खेतों में पर्याप्त नमी होने से ज्वार, बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार, तिल और मूंगफली सहित अन्य फसलों की बढ़वार तेज हो रही है।


वहीं बारिश के बाद खरपतवार भी तेजी से फैलने लगा है, जिससे किसान इसके नियंत्रण में जुट गए हैं।

कई किसान खेतों में खरपतवारनाशक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, जबकि अनेक किसान पारंपरिक तरीके से निराई-गुड़ाई कर अवांछित घास हटा रहे हैं। बारिश के बाद खेतों में नमी बने रहने से खरीफ फसलों का विकास तेजी से हो रहा है।
समय पर नियंत्रण जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि शुरुआती अवस्था में खरपतवार पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए समय पर खरपतवार प्रबंधन आवश्यक माना जाता है।

किसानों ने साझा किए अनुभव
गोपालपुरा निवासी किसान परसराम जाट ने बताया कि बारिश के बाद फसलों की बढ़वार अच्छी हो रही है, लेकिन इसके साथ ही खेतों में खरपतवार भी तेजी से उग रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए किसान खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग कर रहे हैं, वहीं कई किसान निराई-गुड़ाई का सहारा ले रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर खरपतवार हटाने से फसलों का विकास बेहतर होता है और अच्छी पैदावार की संभावना बढ़ जाती है।
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उन्होंने किसानों से अपील की कि खरपतवारनाशक दवाओं का उपयोग कृषि विशेषज्ञों या अनुभवी व्यक्तियों की सलाह के अनुसार ही करें, ताकि खरपतवार का प्रभावी नियंत्रण हो सके और फसल पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
बेहतर उत्पादन की उम्मीद
क्षेत्र के किसानों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण सहित अन्य कृषि कार्य किए गए तो इस बार खरीफ फसलों से बेहतर उत्पादन मिलने की उम्मीद है।






