कुचामन सिटी. देश का अन्नदाता इस समय खेती के सबसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। खेतों में जुताई-बुवाई का काम जोर पकड़ चुका है। इसी बीच डीजल के बढ़ते दामों ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है।


खेती के सीजन में दिन-रात मेहनत कर रहे किसानों पर बढ़ती डीजल कीमतों ने नया आर्थिक बोझ डाल दिया है।

गांवों में इस समय जुताई और बुवाई का कार्य जोरों पर चल रहा है। खेतों में ट्रैक्टर की गड़गड़ाहट के बीच किसान अब फसल से ज्यादा बढ़ते खर्च की चिंता करता नजर आ रहा है। तस्वीर में खेत में जुताई करते किसान की मेहनत साफ दिखाई दे रही है, लेकिन अब ट्रैक्टर चलाना भी किसानों के लिए महंगा साबित होने लगा है।
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है। जुताई, सिंचाई, बुवाई और फसल ढुलाई जैसे हर जरूरी काम में डीजल की जरूरत होती है, जिससे किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।

किसान नेता परसाराम बुगालिया ने कहा कि एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है। वहीं दूसरी तरफ खेती में उपयोग होने वाला डीजल लगातार महंगा किया जा रहा है। इससे साफ है कि खेत में पसीना बहाने वाले अन्नदाता की परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
कृषि डीजल राहत योजना लागू करने की मांग :-
उन्होंने कहा कि किसान पहले से ही मौसम की मार, महंगे खाद-बीज और बिजली संकट से जूझ रहा है। ऐसे में डीजल के बढ़े दामों ने खेती को और अधिक घाटे का सौदा बना दिया है। उन्होंने सरकार से किसानों के लिए जल्द “कृषि डीजल राहत योजना” लागू करने की मांग की ताकि खेती में उपयोग होने वाले डीजल पर राहत मिल सके।
ग्रामीण किसानों का कहना है कि खेतों में मेहनत करने वाला किसान आज सबसे ज्यादा आर्थिक दबाव में है। यदि खेती की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो इसका असर आने वाले समय में आम जनता की थाली तक दिखाई देगा।
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