कुचामन सिटी. संवत् 2082 में होलिका दहन को लेकर विद्वानों ने शास्त्रों के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी के दिन 2 मार्च 2026 को प्रदोषकाल में पूर्णिमा और संपूर्ण रात्रि में भद्रा की व्याप्ति रहेगी।


वहीं दूसरे दिन 3 मार्च 2026 को पूर्णिमा सूर्यास्त से पूर्व समाप्त हो रही है और उसी दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण भी है।

शास्त्रीय मत के अनुसार सामान्य स्थिति में साढ़े तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा व्याप्त होने और प्रतिपदा तिथि वृद्धिगामी होने पर होलिका दहन पूर्णिमा के दिन किया जाना चाहिए। किंतु इस वर्ष 3 मार्च को ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होने तथा प्रदोषकाल से पूर्व ही पूर्णिमा समाप्त हो जाने के कारण विशेष ग्रहण-विचार लागू होता है।
धर्मग्रंथ धर्मसिंधु में उल्लेख है कि यदि दूसरे दिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो और प्रदोषकाल में पूर्णिमा उपलब्ध न हो तो होलिका दहन पूर्व दिवस में ही करना शास्त्रसम्मत माना गया है। इसी आधार पर इस वर्ष 2 मार्च 2026 को ही प्रदोषकाल में होलिका दहन करना उचित बताया गया है।

भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त
2 मार्च को भद्रा सायं 05:56 बजे से प्रारंभ होकर रात्रि शेष 26:26 (अर्थात 3 मार्च प्रातः 05:26 बजे) तक रहेगी। शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि भद्रा निशीथकाल (मध्यरात्रि) के बाद तक रहे तो प्रदोषकाल में भद्रा का मुख त्यागकर होलिका दहन किया जा सकता है।
इस वर्ष प्रदोषकाल में भद्रा का मुख नहीं रहेगा। इसलिए सूर्यास्त से लगभग 2 घंटे 24 मिनट के भीतर, अर्थात प्रदोष वेला में ही होलिका दहन करना शास्त्रोक्त और शुभ माना गया है।
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