कुचामन सिटी में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी है। सफाई कार्य पूरी तरह ठप होने से शहर की सड़कों पर गंदगी के ढेर लग गए हैं और कई स्थानों पर नालियां जाम हो चुकी हैं। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


जानकारी के अनुसार – कुचामन की सफाई व्यवस्था का टेंडर एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया है। सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण वे हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनका बकाया वेतन जारी नहीं किया जाता तब तक वे काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं। इस धरने में घर-घर जाकर कचरा एकत्रित करने वाले कर्मचारी तथा सड़कों की सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी शामिल हैं और सभी हड़ताल पर हैं।


शहर में सफाई नहीं होने से बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपरिषद के जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस समस्या के प्रति गंभीर नहीं हैं। उनका आरोप है कि बड़े-बड़े बजट घोषित किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आता।
नागरिकों ने सवाल उठाया है कि सफाई व्यवस्था और सड़कों की मरम्मत के लिए आवंटित धनराशि कहां खर्च हुई। लोगों का कहना है कि इस संबंध में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
गौरतलब है कि कुचामन सिटी में लंबे समय से सफाई व्यवस्था को लेकर असंतोष बना हुआ है। शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर न तो कांग्रेस और न ही भाजपा के कार्यकाल में कोई स्थायी सुधार हो पाया है।
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