डीडवाना-कुचामन जिले में कस्टोडियन जमीनों को सरकारी घोषित करने के विरोध में सोमवार को सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट के सामने महापड़ाव डाला। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस कार्रवाई को किसान विरोधी बताया।


इस महापड़ाव में लाडनूं विधायक मुकेश भाकर, मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत, डीडवाना के पूर्व विधायक चेतन डूडी और महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सारिका चौधरी सहित कई नेता किसानों के समर्थन में शामिल हुए। महापड़ाव का नेतृत्व किसान नेता भागीरथ यादव ने किया।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर खुद को किसान हितैषी बताती है, वहीं दूसरी ओर उनकी पुश्तैनी जमीनें हड़पने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि वे इन जमीनों पर आज़ादी से पहले से खेती कर रहे हैं और कई स्थानों पर तो घर व बस्तियां भी बस चुकी हैं। इसके बावजूद प्रशासन इन जमीनों को कस्टोडियन बताकर अपने कब्जे में ले रहा है।
किसानों ने बताया कि हाल ही में प्रशासन ने कुछ गांवों में नोटिस चिपकाकर जमीनें सरकारी घोषित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष है। किसानों का कहना है कि वे इन जमीनों पर वर्षों से खेती कर रहे हैं, राजस्व जमा कर रहे हैं, और उनके पास पुराने कागजात व रसीदें भी हैं, फिर भी सरकार उनकी सुनवाई नहीं कर रही।

उन्होंने मांग की कि कस्टोडियन जमीनों पर काबिज किसानों को खातेदारी अधिकार दिए जाएं और बेदखली की कार्रवाई रोकी जाए।
धरने को संबोधित करते हुए कांग्रेस विधायकों ने प्रशासन और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा—
मकराना विधायक जाकिर हुसैन ने कहा कि “कलक्टर जिले का मुख्यमंत्री होता है। उसे यह पता होना चाहिए कि कहां विकास हो रहा है और कहां नहीं। लेकिन कलक्टर ने सिर्फ आश्वासन दिया, इसलिए आज यह महापड़ाव किया गया है। किसान किसी जाति का नहीं होता, लेकिन यह बीजेपी सरकार किसान विरोधी सरकार है। दिल्ली से पर्ची आती है, मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर में घूमते हैं और शाम को दाल-बाटी खाकर सो जाते हैं। आज प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी हावी है, सरकार केवल उद्योगपतियों की बात करती है। अगर कोई किसान का बेटा मेहनत से कुछ कमा लेता है, तो उसकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है जैसा कि कुचामन में हुआ।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि – “जब तक कलक्टर स्वयं नहीं आते, तब तक महापड़ाव जारी रहेगा।”
वहीं मुकेश भाकर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि
“प्रशासन को लगा कि इन गरीब किसानों की जमीन चाहे जैसे अधिग्रहित कर लो इनके लिए कोई नहीं आएगा। लेकिन हमने पहले ही कहा था कि कलक्टर साहब आदमी मारने पड़ेंगे, भूमि ऐसे नहीं मिलेगी।” उन्होंने सरकार और प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था अब जनता के हितों से दूर हो चुकी है।
किसान नेता भागीरथ यादव ने बताया कि कलक्टर ने पहले भी आश्वासन दिया था लेकिन उसके बाद भी पट्टे जारी कर दिए गए। इस कारण आज यह महापड़ाव आयोजित हुआ है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में आंदोलन की रूपरेखा इस प्रकार तय की गई है –
- 15 नवंबर को किसान सम्मेलन आयोजित किया जाएगा,
- 17 नवंबर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पुतला जलाया जाएगा,
- 18 नवंबर को जिला कलक्टर महेंद्र खड़गावत का पुतला दहन होगा,
- 21 नवंबर को डीडवाना बाजार बंद करने का निर्णय लिया गया है,
- और 22 नवंबर से कलेक्ट्रेट के बाहर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 1947 में भारत विभाजन के दौरान पाकिस्तान जाने वाले लोगों की छोड़ी हुई जमीनों को सरकार ने “कस्टोडियन संपत्ति” घोषित किया था। हालांकि, कई परिवारों के सदस्य भारत में ही रह गए और इन जमीनों पर खेती करते रहे।
हाल ही में सरकार द्वारा इन जमीनों को सरकारी घोषित करने की कार्रवाई शुरू की गई है, जिसके चलते किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कुछ दिन पहले 27 अक्टूबर को भी सीकर सांसद अमराराम, लाडनूं विधायक मुकेश भाकर, चेतन डूडी और अन्य नेताओं ने कलेक्ट्रेट घेराव किया था। उस दौरान मुकेश भाकर को चोट भी लगी थी और कलक्टर को ज्ञापन देने के बाद उन्होंने किसानों की समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया था।






