परबतसर: दीवानी मूल प्रकरण में न्यायालय द्वारा पारित आदेश की पालना नहीं करने पर कुचामन सिटी निवासी राजू उर्फ राजूराम को गिरफ्तार कर परबतसर की अदालत में पेश किया गया। सहायक नाजिर गोविन्द राम लोमरोड़ ने यह कार्रवाई की।


7 लाख से ज्यादा की किश्तें चुकानी थी
यह मामला सावित्री देवी और उनके परिवार की ओर से दायर मुकदमे से जुड़ा है। इस मामले में प्रतिवादी राजू उर्फ राजूराम और उनकी पत्नी बेबी पर बकाया रकम चुकाने का दायित्व था। अदालत ने 2 फरवरी 2023 को अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि सावित्री देवी पक्ष को कुल 7,84,000 रुपए (7 लाख मूलधन और 84 हजार ब्याज सहित) मिलने चाहिए।

अदालत ने आदेश दिया था कि यह राशि 39 मासिक किश्तों में चुकाई जाए। पहली किश्त 20,000 रुपए की 3 अप्रैल 2023 को जमा करनी थी। इसके बाद हर माह समान राशि की किश्त देनी थी और अंतिम किस्त शेष रकम एकमुश्त चुकानी थी। आदेश में यह भी कहा गया था कि किसी किश्त की अदायगी में चूक होने पर उस किश्त पर 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
किश्तें जमा नहीं करने पर, किया वारंट जारी
लेकिन कुचामन सिटी के हरिजन बस्ती निवासी राजू उर्फ राजूराम और उनकी पत्नी बेबी ने किश्तें जमा नहीं करवाईं। इसके चलते सावित्री देवी पक्ष के अधिवक्ता प्रेमप्रकाश जोशी ने 6 अप्रैल 2024 को अदालत में इजराय पेश कर वसूली की कार्यवाही शुरू करवाई।

अदालत ने वसूली वारंट जारी किया, लेकिन जब्त करने योग्य सामान न मिलने पर सहायक नाजिर ने रिपोर्ट दी। इसके बाद पीठासीन अधिकारी रामपाल (आर.जे.एस.) ने आदेश 21 नियम 38 के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
कोर्ट में पेश करने पर मांगा समय
गिरफ्तारी वारंट की पालना में सहायक नाजिर गोविन्द राम लोमरोड़ ने कुचामन सिटी स्थित हरिजन बस्ती से राजू उर्फ राजूराम को गिरफ्तार किया और परबतसर स्थित वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया।
अदालत में राजू उर्फ राजूराम के अधिवक्ता ने स्वास्थ्य का हवाला देकर राशि जमा करने के लिए समय मांगा। जिस पर पीठासीन अधिकारी रामपाल ने आगामी पेशी तक का समय दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अगली पेशी तक राशि जमा नहीं करवाई गई तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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