कुचामन सिटी के साथ आज देशभर में पूरा मुस्लिम समाज पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब का 1500वां जन्मदिवस बड़े ही खास अंदाज़ में मना रहा है।


यह दिन न सिर्फ़ खुशी और जश्न का है, बल्कि पैगंबर की सीरत पर अमल करने और उनकी तालीमात को ज़िंदगी में उतारने का अहद भी दिला रहा है। ईद मीलादुन्नबी का यह ऐतिहासिक जश्न अमन, मोहब्बत और भाईचारे के पैग़ाम के साथ मनाया जा रहा है। कुचामन सिटी में इस अवसर पर जुलूस ए मुहम्मदी निकाला जा रहा है जिसमें हजारों की तादाद में मुस्लिम धर्मावलंबी शामिल है।


जुलूस-ए-मुहम्मदी में उमड़ा जनसैलाब
कुचामन शहर की गलियों और रास्तों से गुज़रते हुए जुलूस में हजारों मुस्लिम धर्मावलंबी शामिल हो रहे हैं। बच्चे, युवा, जवान और बुज़ुर्ग—हर कोई “मुहब्बत-ए-मुस्तफ़ा” के जज़्बे से सराबोर नज़र आ रहा है। जुलूस में “या रसूलल्लाह” के नारे गूंज रहे हैं और माहौल इश्क़-ए-रसूल की रौनक से भर गया है।


धार्मिक और देशभक्ति का संगम
जुलूस में शामिल लोगों के हाथों में इस्लामी झंडों के साथ तिरंगे झंडे भी लहरा रहे हैं, जिससे फिज़ा एक साथ धार्मिक और देशभक्ति के रंग में रंग गई है। यह नज़ारा लोगों को नबी-ए-करीम के पैग़ाम के साथ देश की एकता और भाईचारे की याद भी दिला रहा है।

अनुशासन का पैग़ाम – मदरसा इस्लामिया सोसायटी के सदस्य जुलूस में शामिल लोगों को एक साथ चलने और अनुशासित ढंग से आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं। क़तारबंदी और नज़्मो-ज़बत का पालन करते हुए लोग पूरे जश्न को अमन और मोहब्बत का पैग़ाम बना रहे हैं।

अमन, मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम
1500 साला ईद मिलादुन्नबी का यह जश्न सिर्फ़ जश्न नहीं, बल्कि अहद है कि हम नबी-ए-करीम की तालीमात के मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी ढालें, अमन और भाईचारे को आम करें और दुनिया को बताएं कि इस्लाम रहमत, इंसानियत और मोहब्बत का मज़हब है।
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