कुचामन सिटी. शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के आज सप्तम दिवस में विपिन बिहारी शरण महाराज ने हिंदू धर्म की विवाह पद्धति का महत्व बताते हुए कहा कि जो भी प्राचीन परंपराएं हैं, उनमें बहुत बड़ा विज्ञान छिपा हुआ है।


उन्होंने आगे कथा में बताया कि चार स्थान ऐसे हैं जहाँ कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए – पहला अपने मित्र के घर, दूसरा भगवान के मंदिर में, तीसरा अपनी बहन-बेटी के यहाँ और चौथा किसी राज अधिकारी या राजा के यहाँ।

भगवान अपने समस्त पुत्रों को धर्म की शिक्षा देते हुए कहते हैं कि कभी भी जीवन में संत और ब्राह्मणों का अपमान नहीं करना चाहिए। जो ऐसा करता है, उसका विनाश निश्चित है। इस संदर्भ में भगवान ने पांडवों के राजसूय यज्ञ में संतों की चरण सेवा और उनकी झूठी पत्तल उठाकर यह संदेश दिया कि किसी भी अनुष्ठान या धार्मिक आयोजन में, संसार के लोग जिस कार्य को छोटा समझते हैं वही सबसे बड़ी सेवा होती है।


आज की कथा में श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि मित्र धर्म क्या होता है – जो संकट में साथ दे और संसार में मान बढ़ाए वही सच्चा मित्र होता है। जीवन में हजार मित्र होना आवश्यक नहीं है, केवल एक मित्र हो, वह भी भगवान श्रीकृष्ण जैसा हो तो जीवन सफल हो जाता है। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जी की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर सभी श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

शिव मंदिर में आयोजित इस भागवत कथा में समस्त कुम्हारान पंचायत ट्रस्ट अध्यक्ष राजकुमार फौजी, सचिव हंसराज मारवाल, कोषाध्यक्ष भेरूलाल धुमाणिया, रुघाराम घोडेला, सन्तोष सिहोटा, रामुजी पिपलोदा, खेमजी जेठीवाल, राजुजी मारवाल, मुलचंद नागा, अमरचंद भोभरिया, शिवजी राहोरिया, कन्हैयालाल बारवाल, जगदीश सिघाटया, भंवरलाल बालोदिया, रामचन्द्र बालोदिया, रुपाराम मरेठिया, राजु साड़ीवाल, खेताराम राजोरिया, रामदेव सिहोटा सहित सैकड़ों की तादाद में समाज के गणमान्य समाज बंधु एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा का आनंद लिया।
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