कुचामनसिटी। शहर की नगरपरिषद में सभापति और उपसभापति को निलंबित करने को लेकर पिछले एक सप्ताह से शहर में चर्चाएं जोरों पर है। हालांकि खबर लिखे जाने तक निलंबन आदेश जारी नहीं हुए है।
पढ़ें हेमंत जोशी की यह रिपोर्ट –


खास बात यह है कि यह चर्चाएं सत्ता पक्ष के लोगों की ओर से ही की जा रही है, जिससे इन चर्चाओं को बल भी मिला है। इस मुद्दे को अफवाह इसलिए नहीं कहा जा सकता क्यों कि खुद भाजपाई हर जगह यह दावे करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल अब तब आदेश जारी नहीं हुए है लेकिन सभापति आसिफ खान ने सोमवार को नगरपरिषद का सरकारी वाहन नगर परिषद को लौटा दिया है। इसके अलावा सभापति और उपसभापति हेमराज चावला ने सोमवार को परिषद पहुंच कर सभी कार्मिकों को यह भी कहा कि कोई पेंडेंसी है तो वह आज ही पूर्ण कर ले।
ऐसे में यह कहा जा सकता है इन चर्चाओं में कहीं सत्यता तो है। इधर सभापति और उपसभापति के निलंबित होने से पहले ही कुछ पार्षद खुद को सभापति घोषित करने में लगे है।
बताया जा रहा है कि पार्षद सुरेश सिखवाल, छीतर कुमावत और अयूब शेख का नाम भी चर्चाओं में है। हालांकि कांग्रेस बोर्ड का सर्वाधिक विरोध करने और जनहित के मुद्दों पर आंदोलन प्रतिपक्ष नेता अनिलसिंह मेड़तिया ने किए थे। ऐसे में यदि सत्ता पक्ष की ओर से सभापति और उपसभापति को हटाने की कार्रवाई की जाती है तो पहला हक भी अनिलसिंह मेड़तिया का बनता है।

आखिर क्या है कारण –
परिषद में आसिफ खान पहली बार बिना पार्षद का चुनाव लड़े हाइब्रिड प्रणाली से सभापति बने थे। भले ही चुनाव में बहुत भाजपा को मिला लेकिन जोड़तोड़ की राजनीति और भाजपा में भीतरघात से आसिफ खान सभापति बन गए। इसके बाद से ही भाजपा में आसिफ खान को लेकर आक्रामक रुख है।
उपसभापति भी हटे तब बने भाजपा का सभापति
नियमों पर यदि गौर करें तो सभापति को हटाने पर उपसभापति को कार्यभार दिया जाता है। ऐसे में पिछले दिनों उपसभापति को भी नोटिस जारी किया गया था। भाजपा चाहती है यदि सभापति बदला जाए तो भाजपा पार्षद को सभापति बनाए। ऐसे में यह कवायद की जा रही है।
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