कुचामन सिटी. उपखंड में पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण चौमासा की फसलों को लेकर किसानों में चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी से खेतों में नमी समाप्त हो रही है, जिससे खरीफ फसलों के विकास में बाधा आ रही है।


ज्वार, बाजरा, मूंग, मोठ, मूंगफली, तिली और ग्वार की फसलें सूखने लगी हैं। वहीं, लगातार दक्षिण-पश्चिमी हवा चलने से जमीन की नमी और तेजी से खत्म हो रही है और फसलों पर कीट प्रकोप भी शुरू हो गया है।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
स्थानीय किसान गोपालपुरा निवासी परसाराम जाट ने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत में बारिश ठीक हुई थी, जिससे किसानों ने खुशी-खुशी बुवाई, निराई-गुड़ाई कर फसलों को तैयार किया था। फसलें अच्छी बन गई थीं और इस वर्ष अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन अब बारिश रुकने से बाजरा, दलहन, तिलहन, ग्वार, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें बिना पानी सूखने लगी हैं।

उन्होंने कहा कि किसानों के पास आजीविका का दूसरा जरिया पशुपालन है, लेकिन चारे की कमी से मवेशी बेचने तक की नौबत आ सकती है।
बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर गंभीर असर पड़ेगा
इलाके के किसान मुननाराम महला, कमलकांत डोडवाडिया, झूमरमल बिजारणिया, बीरमाराम बांगड़वा, हनुमानराम, रामेश्वरलाल, रूघाराम, छिगनाराम बुगालिया, घासीराम भंवरीया, गोविन्दराम बिजारणिया और शोदानराम बुगालिया ने बताया कि बारिश की कमी से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो गया है और चौमासा की फसलों का विकास रुक गया है।
यह स्थिति किसानों की आर्थिक हालत पर नकारात्मक असर डाल रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर गंभीर असर होगा। वर्तमान में किसान केवल प्राकृतिक वर्षा के भरोसे खेती कर रहे हैं।
खेतों में नमी कम होने से फटने लगी मिट्टी
बारिश थमने से खेतों की नमी कम होने पर मिट्टी फटने लगी है। जिनके पास ट्यूबवेल या कुआं है, वे सिंचाई कर फसलें बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस साल समय पर बारिश होने से खरीफ सीजन की फसलों की शत-प्रतिशत बुवाई हुई थी, लेकिन लंबे अंतराल ने अच्छी पैदावार पर संकट खड़ा कर दिया है।
मूंगफली, ज्वार, बाजरा, तिली, मूंग और मोठ की फसलें शुरू में अच्छी लहलहा रही थीं पर अब सूखने लगी हैं। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। फिलहाल किसान बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि समय रहते वर्षा हो जाए ताकि उनकी फसलें और आजीविका बच सके।

कृत्रिम वर्षा क्या बदल पाएगी किसानों का नसीब?
राजस्थान के रामगढ़ बांध पर कृत्रिम वर्षा के लिए 12 अगस्त को नई तारीख तय की गई है। इस प्रक्रिया में अमेरिकी कंपनी एक्सल-1 के साथ कृषि विभाग काम कर रहा है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय से 10 हजार फीट की ऊंचाई तक ड्रोन उड़ाने की अनुमति मिलने के बाद करीब पंद्रह दिन तक मौसम और बादलों का अध्ययन किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगस्त-सितंबर में बादल पर्याप्त नहीं होंगे तो कृत्रिम वर्षा संभव नहीं होगी। वर्षा के लिए भारतीय ड्रोन का उपयोग किया जाएगा।
अगर यह तकनीक सफल रही तो राजस्थान के किसानों के लिए यह वरदान साबित हो सकती है, लेकिन इसका असर पूरी तरह मौसम और बादलों की मौजूदगी पर निर्भर करेगा।






