कुचामन सिटी. 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर डीडवाना रोड पर चल रहे दशलक्षण महापर्व के नवम दिवस गुरुवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आराधना की गई।
प्रातः 6:30 बजे 75 श्रावकों ने कलशाभिषेक किया। इसके बाद भगवान आदिनाथ एवं भगवान शांतिनाथ की शांतिधारा हुई।

शांतिधारा करने का सौभाग्य विमल कुमार, मुकेश एवं अमित काला परिवार, विमलचंद, विनय एवं विकास पहाड़िया परिवार, सोहनलाल एवं मनोज कुमार काला परिवार तथा राजेश कुमार एवं मुकेश कुमार गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर उत्तम आकिंचन्य धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि आकिंचन्य का अर्थ किसी वस्तु, व्यक्ति, संपत्ति, पद, मान-सम्मान और सांसारिक मोह के प्रति ममत्व एवं आसक्ति का त्याग करना है। धर्म हमें बाहरी वस्तुओं के त्याग के साथ मन में बसे ‘मेरा-तेरा’ के भाव को छोड़ने की प्रेरणा देता है। ममत्व और आसक्ति से मुक्त होकर ही मनुष्य शांति, संतोष एवं आत्मिक निर्मलता की ओर बढ़ सकता है।

मंदिर में श्रावक-श्राविकाओं ने नवदेवता पूजन, सोलह कारण पूजन, सिद्ध पूजन, दशलक्षण पूजन, दशलक्षण विधान, त्याग धर्म पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर पूजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।
सांयकाल आरती एवं सामायिक के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। धार्मिक अंताक्षरी में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता करते हुए धर्मलाभ एवं पुण्यार्जन किया।







