कुचामन में इस बार के चुनावों में बीजेपी, कांग्रेस और आरएलपी के साथ-साथ एक चौथा मुकाबला अब निर्दलीयों का बन गया है। संभावना है कि इस बार नगर परिषद में किसका राज होगा, इसका एपिसेंटर ये निर्दलीय प्रत्याशी होंगे।
ये निर्दलीय प्रत्याशी और कोई नहीं, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस से टिकट न मिलने से नाराज वे लोग हैं, जो अपने आपको इस चुनावी रण में अकेले उतारने की तैयारी कर रहे हैं। जिन पर पार्टियों ने तो विश्वास नहीं किया, लेकिन उन्हें अपनी राजनीति पर भरोसा है, जिसके आधार पर वे बड़ी पार्टियों को खुली चुनौती दे रहे हैं।

कल जब बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों की सूची सामने आई तो बगावत के सुर और ऊंचे उठ गए। प्रदेश नेतृत्व को मामले को देखना पड़ा। कुचामन में बीजेपी के झंडे तक जलाए गए और जिला अध्यक्ष के खिलाफ भी नारेबाजी हुई।
पार्टियां लगी हैं डैमेज कंट्रोल में
कल नामांकन का आखिरी दिन था। पार्टियां अपने चुनाव चिह्न भी बांट चुकी हैं। लेकिन अब उनके सामने एक बड़ी जिम्मेदारी है, जो है बगावत पर उतर आए प्रत्याशियों को मनाने की। कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के प्रमुख नेता डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं और नाराज नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को समझाने में लगे हैं।

बीजेपी में राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी सहित अन्य बड़े पदाधिकारियों को यह जिम्मा सौंपा गया है कि नाराज कार्यकर्ताओं को समझाया जाए। वहीं, कांग्रेस की तरफ से भी कई प्रमुख नेता यही काम करने में लगे हुए हैं।
क्यों हो रही पार्टियों को चिंता?
कुचामन में कुल 45 वार्ड हैं, जिनमें से बीजेपी ने 41 और कांग्रेस ने 45 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतार दिए हैं। वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) से 7 प्रत्याशी मैदान में हैं। मतलब, 93 उम्मीदवार पार्टियों के बल पर चुनावी मैदान में हैं।
वहीं, 246 उम्मीदवार ऐसे हैं जो अब निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। इनमें वे दिग्गज नेता भी शामिल हैं, जो कई वर्षों से कुचामन की जमीनी राजनीति में सक्रिय हैं। लेकिन किसी कारण से उन्हें टिकट नहीं मिला। अगर ये उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं तो वे अन्य पार्टियों के समीकरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
इसीलिए कहा जा सकता है कि निर्दलीय उम्मीदवारों के सहारे की जरूरत हर उस पार्टी को पड़ेगी, जो नगर परिषद में सत्ता संभालना चाहती है।
अभी 3 सितंबर तक नामांकन वापस लेने का समय है। पार्टियों के बड़े पदाधिकारी लगे हुए हैं कि नाराज प्रत्याशियों को समझाया जाए और उन उम्मीदवारों के नामांकन वापस करवाए जाएं, जो पार्टी के लिए या तो वोट काट सकते हैं या फिर खुद जीत अपने नाम कर सकते हैं।
ऐसे में इस बार कुचामन नगर परिषद के चुनाव में असली खेल सिर्फ बीजेपी, कांग्रेस और आरएलपी के बीच नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका पर भी काफी हद तक निर्भर करता दिखाई दे रहा है।
कुचामन नगर परिषद चुनाव: BJP, कांग्रेस और RLP के उम्मीदवारों की सूची जारी







