कुचामन सिटी. सब्जी मंडी स्थित नई नासियां जी में मंगलवार को दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत उत्तम तप धर्म का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ लिया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि जैन धर्म में तप आत्मशुद्धि और कर्मों की निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन है। तप केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन को संयमित रखते हुए इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मचिंतन के माध्यम से आत्मा को निर्मल करने की साधना है।
नई नासियां जी में भगवान का कलशाभिषेक एवं पूजन किया गया। इसके बाद शांतिधारा का आयोजन हुआ। शांतिधारा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। पहली शांतिधारा का सौभाग्य ओमप्रकाश, सुनील कुमार एवं अशोक कुमार परिवार तथा दूसरी शांतिधारा का सौभाग्य दीपक, उजास, मनन, गीतांश एवं अर्णव झांझरी, पालड़ी वालों को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर सुनील भैया, खरगापुर द्वारा देव-शास्त्र पूजा एवं दशलक्षण विधान कराया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ लिया। भगवान जिनेंद्र देव की आरती का सौभाग्य भी पालड़ी वालों श्रद्धालु परिवार को प्राप्त हुआ।
वहीं, किरण झांझरी ने बताया कि तप धर्म के माध्यम से मनुष्य अपनी आसक्ति और विकारों को दूर कर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ता है। बाहरी तप के साथ मन की शुद्धि, इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मचिंतन भी आवश्यक है।
सोनू झांझरी के तेला उपवास के अवसर पर पुरस्कार वितरण भी किया गया। समाजजनों ने तप की अनुमोदना करते हुए तपस्वी का उत्साहवर्धन किया। दशलक्षण महापर्व के इस पावन अवसर पर नई नासियां जी में दिनभर धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।







