कुचामन सिटी के होटल रामिया रिसॉर्ट में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों एवं उनके अभिभावकों के लिए एक विशेष जागरूकता एवं क्षमता-विकास शिविर “मधुरंग” का आयोजन किया गया।


यह कार्यक्रम मिशन मधुहारी के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों को इस बीमारी के प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ एक यादगार एवं आनंदमय सीखने का अवसर प्रदान करना था। इस कार्यक्रम का संचालन विलियम जॉन क्लिंटन फाउंडेशन (WJCF) द्वारा किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर के माननीय राज्य नोडल अधिकारी (SNO) डॉ. सुनील सिंह ने की। शिविर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेंद्र चौधरी, नोडल अधिकारी डॉ. चेना राम एवं डॉ. हरीश ढाका उपस्थित रहे। कार्यक्रम में लगभग 100 बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
डायबिटीज प्रबंधन की दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रभावी प्रबंधन हेतु संतुलित आहार, स्व-प्रबंधन (Self Management), इंसुलिन थेरेपी, नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया गया।

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क्विज़, प्ले एंड लर्न, डांस और ड्रॉइंग प्रतियोगिताओं से बढ़ाया उत्साह
प्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्नेहल एवं उनकी टीम द्वारा क्विज़, ‘प्ले एंड लर्न’ गतिविधियां तथा मनोरंजक सहभागिता सत्र आयोजित किए गए।
इसके साथ ही बच्चों के लिए डांस (नृत्य) और ड्रॉइंग (चित्रकला) प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिनमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में डायबिटीज प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं तथा उन्हें एक-दूसरे से सीखने और अपने अनुभव साझा करने का मंच मिला।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बताया कि मिशन मधुहारी राजस्थान सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत प्रारंभ किया गया टाइप-1 डायबिटीज देखभाल का पहला समर्पित कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य बच्चों एवं मरीजों को निःशुल्क इंसुलिन, नियमित जांच एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
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कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य रूप से चार स्तंभों – बेसल-बोलस इंसुलिन थेरेपी, नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, उचित पोषण एवं मानसिक-भावनात्मक सहयोग पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का समापन बच्चों, अभिभावकों एवं विशेषज्ञों के बीच सकारात्मक संवाद और अनुभव साझा करने के साथ हुआ। सभी प्रतिभागियों ने “मधुरंग” को एक बेहद उपयोगी, प्रेरणादायक एवं यादगार पहल बताते हुए इसकी सराहना की।
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