कुचामन सिटी. राजस्थान में भाजपा अभी सत्ताधारी है। वैसे तो सरकार से कोई टक्कर नहीं लेता, लेकिन नागौर के सांसद थोड़ा अलग मिजाज रखते है। उनकी बयानबाजी ने पूरी भाजपा को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है।


सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। FIR दर्ज करवाई गई। कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया और जिस अधिकारी ने उन्हें जमानत दी, उनको भी रातों-रात जगह बदलनी पड़ी।

राजस्थान की भाजपा सरकार इस बार चीजों को हल्के में नहीं ले रही। पहले भी कई बार हनुमान बेनीवाल मुख्यमंत्री और मंत्रियों को लेकर तीखे बयान देते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे आत्मसम्मान से जुड़ गया। मूर्ख शब्द से की गई तुलना को भाजपा नेताओं ने गंभीरता से लिया।
लेकिन यह टकराव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, अब यह कानूनी लड़ाई का रूप भी ले चुका है।

एक तरफ हनुमान बेनीवाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के सामाजिक बहिष्कार वाले बयान पर मानहानि का नोटिस भेज दिया है। दिल्ली की एक प्रतिष्ठित लीगल फर्म के माध्यम से 19 पेज का कानूनी नोटिस भेजा गया है।
इस पर मदन राठौड़ ने कहा कि उनको नोटिस मिल गया है, उनके लोग तय करेंगे कि आगे करना क्या है।
वहीं नागौर के पादूकलां में करीब 5 महीने पुराने हाईवे जाम प्रकरण में पुलिस उप-अधीक्षक डेगाना के निर्देश पर पादूकलां थाने में दर्ज रोजनामचा रिपोर्ट के आधार पर सांसद हनुमान बेनीवाल सहित कई नेताओं और समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
हनुमान बेनीवाल ने भरतपुर में लाखों की रैली करने की घोषणा कर दी है। कहा कि सरकार में दम है तो रोक के दिखाना फिर बता दूंगा कितनी ताकत है।
उधर डीडवाना-कुचामन के नए पुलिस अधीक्षक ने RLP कार्यकर्ताओं पर इनाम भी घोषित कर दिया। जिन पर इनाम घोषित किया गया वे सभी कुचामन के रहने वाले हैं। इनमें भूराराम शेषमा, रामनिवास कांटवा, मुकेश सारण और दिनेश कूदना शामिल हैं।
सांसद बेनीवाल ने कहा कि भजनलाल शर्मा में दम है तो मुझे गिरफ्तार करके दिखाए।
चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच संघर्ष गहराता जा रहा
31 जुलाई तक निकाय और पंचायत चुनाव कराने के निर्देश हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को दिए हैं। इसके बाद से कई राजनीतिक दल अलर्ट मोड पर हैं। भाजपा भी ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार प्रचार अभियान चला रही है। वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी इस बार पूरा दमखम दिखाने की तैयारी में है।
लेकिन दोनों तरफ की बयानबाजी का नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है। जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया गया। चाहे मंत्रियों और मुख्यमंत्री की तुलना मूर्ख से करना हो या फिर हनुमान बेनीवाल को नशे से जोड़ना। उनके सामाजिक बहिष्कार की बात करना हो। ऐसे बयान जनता पर असर डालते हैं।






